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भोजशाला में दोवी विराजित होने पर होगा अनुष्ठान पूरा: ऋतंभरा

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वृंदावन। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भोजशाला पर निर्णय आते ही विश्व के सनातनियों में आनंद की लहर दौड़ गई, क्योंकि भोजशाला के पीछे का सच दुखदाई, अपमानजनक था। भोजशाला और देवी सरस्वती की प्रतिमा को खंडित करना बहुत ही कष्टदायक रहा। अब बहुत जल्द देवी सरस्वती की मूर्ति लंदन से लाई जाएं और गर्भगृह में विराजित की जाएं, जब जाकर यह अनुष्ठान संपन्न होगा। यह बात उन्होंने वात्सल्य ग्राम स्थित संविद गुरुकुलम गर्ल्स सैनिक स्कूल में कहीं।
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यहां शनिवार को साध्वी ऋतंभरा के साथ कवि एवं गीतकार कुमार विश्वास ने उनके गुरु भाई एवं लेखक देवेंद्र शुक्ल द्वारा लिखित पुस्तक साध्वी ऋतंभरा और राम जन्मभूमि आंदोलन का विमोचन किया। इस दौरान कुमार विश्वास ने पुस्तक को राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पक्षों को जनमानस तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया। धार के भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित करने के मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय पर साध्वी ने कहा कि वह विशाल विश्वविद्यालय था, जहां अलाउद्दीन खिलजी और दिलावर खान ने 1200 विद्यार्थियों की हत्या कर कुंड में फेंका था। वह राजा भोज के सपनों का संसार था। भोजशाला वह पवित्र स्थान है जहां राजा भोज को देवी सरस्वती का साक्षात्कार हुआ। उस जगह पर इतने लंबे संघर्ष के बाद हम विजयी हुए हैं।
कवि कुमार विश्वास ने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि राजा भोज, जिनके कवि मित्र थे, उन्होंने माता सरस्वती का मंदिर बनवाया था। बाद में विदेश से आए आक्रांताओं ने उस पर कब्जा कर लिया। जब हम लोगों को शास्त्रार्थ आता था, पशुता नहीं आती थी। लोकतंत्र आने पर मामला अदालत में गया और दोनों पक्षों ने अपने-अपने सबूत रखे। हाईकोर्ट के फैसले में यह सामने आया कि वहां पहले मंदिर था। उन्होंने कहा कि कि जहां भगवती सरस्वती विराजमान थीं वहां भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार न्याय हुआ है। इससे भारतीय अस्मिता से जुड़े अन्य स्थलों को लेकर भी समाज में सकारात्मक सोच विकसित होगी। दरअसल , इस स्थल पर सन 1875 में हुई खुदाई में मूल वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति मिली थी। बाद में इसके अंग्रेज लंदन ले गए और यह मूर्ति वहां के म्यूजियम में रखी है। अदालत ने केेंद्र सरकार को इस मूर्ति को वापस लाने की याचिका पर विचार करने की अनुमति भी दी है।
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कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने भगवान राम के जीवन पर आधारित भजन प्रस्तुत किया कि राम दृष्टा भी हैं, राम दृष्टि भी हैं, राजा भी हैं राम और तपस्वी भी हैं राम... उनके बोलों के साथ साध्वी ऋतंभरा और विद्यालय की छात्राएं भी सुर में सुर मिलाने लगी। इस अवसर पर विद्यालय के व्यवस्थापक संजय भैया, सुमन लता, साध्वी साक्षी, एच के शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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