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15,000 मजदूरों की छंटनी की तैयारी

Sun, 11 Dec 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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500-1000 के नोट बंद होने से यहां हुआ बड़ा फायदा - फोटो : social media
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नोटबंदी के बाद ठप पड़े उद्योग, कारोबारोें से अब मजदूरों की छंटनी की तैयारी की जा रही है। इधर काम न मिलने से परेशान मजदूर भी माहौल भांप कर अपने-अपने घरों की ओर जा रहे हैं। 
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मथुरा में साड़ी, टौंटी, निवाड़, चांदी, प्रिटिंग प्रेस का बड़ा उद्योग है। इनमें करीब 50,000 से अधिक मजदूर काम करते है। इनमें अधिकांश वो मजदूर है जो बिहार, पश्चिम बंगाल से आकर दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवारों का पालन कर रहे है। 

नोटबंदी के बाद से ही ये उद्योग बंद पड़े हैं। ऐसे में दिहाड़ी मजदूरों के सामने तो रोजीरोटी का संकट खड़ा हो ही गया है वहीं कारखानों में स्थायी रूप से काम करने वाले मजदूरों पर भी छंटनी की तलवार लटकने लगी है। चांदी कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जब काम ही नहीं होगा तो मजदूरों या कर्मचारियों का वेतन कैसे निकलेगा। ऐसे में छंटनी तय है। मथुरा में करीब 15,000 से अधिक लोगों की छंटनी का अनुमान है। 
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उद्योग               संख्या             मजदूर                छंटनी की तैयारी
साड़ी                 50              5,000                  2,000 
टोंटी                  90              8,000                  4,000
निवाड़                45              4,000                  1500
चांदी-गिलट         200             15,000                6,000
स्मॉल स्केल        175             10,000                1500

मंडियों से लौटने लगे मजदूर
धान की फसल पर मंडियों में मजदूरी करने के लिए बिहार से करीब दस हजार मजदूर आए थे। ये मथुरा, कोसीकलां, राया, गोवर्धन की मंडियों में मजदूरी करते हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद दो बार मंडियों में हड़ताल हो चुकी है। इसके बाद भी ठीक से आवक नहीं हो रही है। इसके चलते मजदूर अपने घरों की ओर वापस जाना शुरू हो गए हैं।
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