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सियासी संरक्षण में ताकतवर होता गया रामवृक्ष

Sun, 05 Jun 2016 12:22 AM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
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रामवृक्ष्‍ - फोटो : अमर उजाला
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इकहरा बदन, उम्र पैंसठ साल, रुआबदार चेहरा। गाजीपुर का यह शख्स इतना ताकतवर हो जाएगा कोई नहीं जानता था। गाजीपुर के मरदह थाने के रायपुर बागपुर गांव का रहने वाला रामवृक्ष चंद दिनों में ही एक बड़ा माफिया बन गया। उसने मथुरा के जवाहर बाग पर ढाई साल से कब्जा जमा रखा था, लेकिन न तो सरकार की हिम्मत हुई कि उसे हटा दे और न ही प्रशासन कुछ कर सका।
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रामवृक्ष ने स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन का गठन करके नौजवानों की एक पूरी फौज तैयार कर ली थी। मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में उसने अपने संगठन से हजारों लोगों को जोड़ रखा था। इस संगठन के जरिए वह इतना ताकतवर हो गया कि सरकारों को चुनौती देने लगा। रामवृक्ष उस वक्त चर्चा में आया जब उसने जनवरी 2014 को मध्य प्रदेश के सागर से एक यात्रा शुरू की। इस यात्रा में करीब एक हजार लोग थे। उसने एलान किया कि वह विभिन्न मांगों के लिए दिल्ली घेरेगा, लेकिन उसने अपना रास्ता बदल दिया और मथुरा पहुंच गया। यहां जवाहर बाग पर अपना कब्जा जमा लिया। 14 मार्च 2014 को वह हजारों लोगों के साथ मथुरा पहुंच गया और बाग पर कब्जा जमा लिया। तब से बाग पर उसका कब्जा चला आ रहा था। रामवृक्ष का उत्तर प्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों के मंत्रियों से भी संबंध बताया जाता है।

जवाहर बाग में चलाए ट्रेनिंग कैंप
मथुरा। रामवृक्ष जवाहर बाग में पिछले दो साल से ट्रेनिंग कैंप चला रहा था। नौजवानों को शस्त्र प्रशिक्षण दिया जाता था। महिलाओं की भी फौज तैयार कर ली थी। पुलिस ने जवाहर बाग से तमाम शस्त्र भी बरामद किए हैं। लग्जरी गाड़ियां भी उसके पास थीं। उसकी मंशा प्रदेश के कई आश्रमों पर कब्जा करने की थी।
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नौजवानों की भर्ती को निकाला था विज्ञापन
रामवृक्ष ने नौजवानों की भर्ती करने के लिए इश्तियार तक निकाले थे। पांच हजार से ज्यादा लोगों की भर्ती भी कर ली थी। उसका कहना था कि वह हर नौजवान को पांच हजार रुपये और रहने के लिए मकान देगा। एक बार को तो जवाहर बाग में भर्ती के लिए नौजवानों का कैंप लग गया था।
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1976 में इमरजेंसी के दौरान जेल गया
जेल में छूटने के बाद जयगुरुदेव का शिष्य बना
1977 में जहूराबाद से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा
दूरदर्शी पार्टी से 1984 में गाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा
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