वर्षभर श्रीकृष्ण की लीलाओं से सजी रहने वाली धर्मनगरी देश विदेश में राम की लीलाओं का गुणगान कर रही है। विश्व के अनेक देशों में रामलीला मंचन के लिए वृंदावन की रासलीला मंडलियों की मांग रहती है। थाइलैंड, सिंगापुर, अमेरिका, सूरीनाम और मॉरीशस जैसे देशों तक हर वर्ष यहां की मंडलियां राम नाम की अलख जगा रही हैं।
पद्मश्री रासाचार्य स्वामी रामस्वरूप शर्मा का कहना है कि राम और कृष्ण के चरित्र के श्रवण, दर्शन और मंचन का महत्व समान ही है। 86 वर्ष की उम्र में भी उन्हें ठाकुरजी की लीलाओं को जन-जन तक पहुंचाने में वही आनंद प्राप्त होता है जो बीते 80 वर्षों से श्रीकृष्ण चरित्र में और विगत 50 वर्षों से श्रीराम के चरित्र का मंचन और निर्देशन करने में प्राप्त हो रहा है। स्वामीजी बताते हैं कि उन्होंने 60 के दशक में रामलीला मंचन शुरू किया। रंग भवन दिल्ली में देश की जानी मानी रासलीला में हुई प्रतिस्पर्धा में उनकी मंडली ने प्रथम रही और केंद्र सरकार की ओर से वे पहली बार थाइलैंड में रामलीला का मंचन करने गए। इसके बाद देश के अधिकांश राज्यों में उन्होंने रामलीला का मंचन किया। मंबई के जुहू में 22 वर्षों से रामलीला का मंचन कर रहे हैं। इस बार उनके पुत्र छोटे ठाकुर द्वारा 27 सितंबर से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।
डा. स्वामी देवकीनंदन कहते हैं कि पिछले 35 सालों से उन्होंने रासलीला के साथ ही रामलीला का मंचन विदेशी धरती के साथ ही देश के प्रत्येक राज्य में किया है। सिर्फ नागालैंड ही इस क्रम में अपवाद रहा। उन्होंने बताया कि मंडली ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और थाइलैंड की धरती को भगवान राम के चरित्र का दर्शन कराया है।
गोलोकवासी पद्मश्री स्वामी हरिगोविंद शर्मा के पुत्र स्वामी राम प्रसाद शर्मा ने कहा कि वृंदावन की भूमि भगवान कृष्ण के प्रेम से आल्हादित रहती है लेकिन श्रीराम की कृपा भी ब्रजवासियों पर समान रूप से है। इसके परिणाम स्वरूप उन्होंने देश विदेश की धरती को रामलीलाओं के मंचन से पवित्र किया है। उन्होंने कहा कि जयपुर में 1985 से 90 तक, मुंबई के क्रास मैदान में 1991 से 2001 तक रामलीला का मंचन किया। रासाचार्य राम प्रसाद शर्मा ने कहा कि उनकी मंडली बुलंदशहर के गुलावटी में 28 सिंतबर से रामलीला का मंचन करेगी।
30 लोगों का दल
वृंदावन से देश और विदेशों में रामलीला का मंचन करने जाने वाली मंडलियों में सभी पात्रों और उनके सहयोगियों को मिलाकर लगभग 30 लोगाें का दल होता है। दल के सभी सदस्यों पर अपने पात्र निभाने की जिम्मेदारी होती है।
धर्मनगरी में 2013 के बाद नहीं हुई रामलीला
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीलाओं का अनवरत क्रम भगवान कृष्ण की क्रीड़ा भूमि वृंदावन में नजर नहीं आ रहा है। बीते दो वर्षों से वृंदावन में रामलीला का आयोजन नहीं किया गया। कई वर्षों से रंगजी के कटरा में होने वाली रामलीला वर्ष 2013 के बाद से नहीं हुई। पद्मश्री स्वामी रामस्वरूप शर्मा ने खेद जताते हुए कहा कि वृंदावनवासियों को रासलीला के साथ रामलीला के मंचन के लिए भी आगे आना चाहिए। रासाचार्य स्वामी रामप्रसाद शर्मा बताते हैं कि वर्षों पहले वृंदावन के मनीपाड़ा में रामलीला का आयोजन होता था। इसके साथ बांकेबिहारी मंदिर के चबूतरे पर रामलीला हुई। यहां जगह कम पड़ने के बाद रंगजी के कटरा में विशाल परिसर में रामलीला का आयोजन होने लगा।