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यमुना के लिए अनशन पर बैठेंगे रमेश बाबा

Fri, 13 Nov 2015 08:19 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
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ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के निर्देशन में चलाए जा रहे यमुना मुक्तिकरण अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को कुंभ मेला स्थल पर ‘यमुना आंदोलन चिंतन और मनन सभा’ हुई। इसमें ब्रज के संत, भागवताचार्य, धर्माचार्य और यमुना भक्तों ने यमुना शुद्धीकरण की हुंकार भरते हुए अभियान की आगे की रणनीति तय की। भक्ताें ने कहा कि इस बार यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो आंदोलन पहले से बड़ा होगा। संत रमेश बाबा यमुना महारानी के लिए स्वयं अनशन पर बैठने की बात कही।
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संत रमेश बाबा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईमानदार हैं लेकिन अध्यात्मिक नहीं। यहीं कारण है कि वे अभी तक यमुनाजी के लिए कुछ नहीं कर पाए। हम बीते आठ माह से केंद्र सरकार की गतिविधियों को देख रहे हैं। सरकार ने कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यमुनाजी को शुद्ध कर दे तो इससे बड़ा शुभ कर्म और कोई नहीं हो सकता। इससे भाजपा की डूबती नैया पार लग सकती है। संघ को भी मजबूती मिलेगी वरना भाजपा को मिटने से कोई नहीं बचा सकता।

गोकुल के पुष्टिमार्गीय संत पंकज बाबा ने कहा कि यमुना भक्तों की मांग मार्च 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनसुनी कर दी थी तो उसे हार का सामना करना पड़ा। यदि अब भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने मांगे नहीं मानी तो दिल्ली, बिहार के बाद यूपी में भी हार का सामना करना पड़ सकता है। मलूक पीठाधीश्वर महंत स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि यमुना भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ को संत समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।
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अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि सरकार ने अब तक झूठा आश्वासन दिया है, यमुना भक्तों की मांग पूरी करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। महंत हरिबोल बाबा महाराज ने कहा कि संतों के सरल, शांत और सौम्य स्वभाव को सरकार गलत नजरिए से ले रही है। अब संत समाज सड़कों पर उतरकर यमुना शुद्धीकरण की आर-पार लड़ाई लड़ेगा। भागवताचार्य पुण्डरीक गोस्वामी ने भी आर-पार लड़ाई की बात कही।

बिहारीलाल वशिष्ठ और कुंवर नरेंद्र सिंह ने यमुना मुक्तिकरण अभियान राजनीतिक नहीं है। इसमें ब्रज का प्रत्येक समाज नि:स्वार्थ भाव से जुड़ा है।  इस अवसर पर सुनील सिंह, पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम, हरेश ठेनुआ, स्वामी संत दास, महंत लक्ष्मण दास, देवकीनंदन शर्मा, रवि शंकर बबेले, श्यामसुंदर उपाध्याय, पंकज शास्त्री, बुद्धिप्रकाश, राघव भारद्वाज, लवकुमार शर्मा, मोहन सोनी, सत्येंद्र सिंह जादौन, लक्की पंडित, पंकज चतुर्वेदी, रामप्रकाश, शशांक शर्मा, बनवारीलाल गौड़, युगल किशोर कटारे, अश्वनी मिश्र, अक्षयपात्र के अनंताचार्य, राजेश किशोर गोस्वामी आदि उपस्थित थे। संचालन आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने किया। आभार डा. रामजीलाल शास्त्री ने जताया।  


धर्म संसद के आयोजन का प्रस्ताव
यमुना मुक्तिकरण अभियान की आगे की रणनीति के लिए संत समाज ने सुझाव भी दिए।  स्वामी आदित्यानंद ने कहा कि अब केंद्र सरकार को जगाने के लिए पैदल मार्च के बजाय सीधे वाहनों से दिल्ली की ओर कूच किया जाए। महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद ने संसद भवन के सामने संतों द्वारा धर्म संसद का आयोजन कराने का सुझाव दिया। पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम ने कहा कि आंदोलन से पहले यमुना भक्तों का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्र सरकार से मिले और मांगों को स्वीकृत कराने का सार्थक प्रयास किया जाए।
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