ब्रजवासियौं! आज तौ राधे के दरबार मै हाजिरी लगाय लेओ। देखौ कैसौ आनंद छाय रह्यौ है। भानुगढ़ मै दुंदुभी बाज रही है। रसिक मगन भये नाच रहे हैं। हमारौ धन राधा श्री राधा राधा... राधे रानी की गगन चुंबी जय-जयकार है रही है। संजा ते ही रसिक जुड़वे लग गए हैं। मंदिर मै पांव रखवे की जगह नाय। चलौ, नैक धक्का दैकै आगै बढ़ लैमैं।
संजा के चार बजे हैं। वनखंडी वाली धर्मशाला ते चाव आय रही है। पीछै पीछै बरसाने के गोस्वामी समाज के लोग गाते आय रहे हैं, मदर बजै श्री वृषभानु कै, धरती पै माई दोई बड़े, बरसाने वृषभानु जू, नंदीश्वर नंदराय। अब जगमोहन मै आ जाऔ। गर्भगृह के पट खुल गए हैं। भक्त राधारानी के दर्शन पायकै प्रफुल्लित है रह्ये।
समाज उ जुड़ गई है। ढप, झांझ, मंजीरा पै गोस्वामी गाय रहे, आजु बधायौ श्री वृषभानु कै, बेटी धरौ भानु घर सातिये, अहो बेटी गिनि गिनि रोपौं सींक। नंदगांव के गोस्वामी उ आय गए हैं। सेवायत भक्तन मै बधाई लुटाय रहे हैं। बाय पाके बे बड़े हर्षाय रहे। सखियां हिल मिल कै नाच रही हैं। किशोरी जू का जन्मोत्सव मनाने के लै बे सब सज धज कै आई हैं। लाड़िली जी मंदिर मै रसिकन कौ मेला उमड़ौ है। बरसाने के गली, बाजार सब बिनते अटे भये हैं।
यमुनोत्री से आता है जल
राधा रानी के अभिषेक के लिए यमुना जल यमुनोत्री से आता है। रामभरोसी मुखिया बताते हैं कि श्रीजी के भक्त ही यह सेवा करते हैं। कालिंदी के मलिन होने के बाद यमुनोत्री से ही जल मंगाया जाता है।
सुहागिन बेटी करेगी आरती
सोमवार शाम 7 बजे जब राधा रानी का डोला उपर जाएगा तो गोस्वामियों की सुहागिन बेटी सोलह शृंगार कर उनकी आरती करेगी। सुहागिन बेटियों को ये अधिकार तीन बार मिलता है, राधाष्टमी, हरियाली तीज और होली के दिन।
सेवकों की भी कमी नहीं
राधाष्टमी पर बरसाने में भक्तों की भरमार है तो सेवकों की भी कमी नहीं। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भंडारे लगाए गए हैं।
परिक्त्रस्मा मार्ग में राधे-राधे
राधाष्टमी पर परिक्रमा मार्ग भी भक्तों से भरा नजर आया। राधे के नाम के सहारे पहाड़ की ऊंचाई चढ़ते श्रद्धालुओं के चेहरे पर सौम्य मुस्कान खेल रही थी।
प्रकृति भी हुई आनंद मग्न
श्यामा जू के जन्मोत्सव पर प्रकृति भी आनंद मग्न हो गई। रात होते-होते तेज हवाओं और हल्की बारिश ने बरसाना का मौसम सुहाना कर दिया। भक्ति के साथ प्रकृति की इस पावस ने सबको तर कर दिया।
जगह-जगह हो रहे कीर्तन
राधारानी के जन्मोत्सव की खुशी में जगह-जगह कीर्तन हो रहे हैं। ढोलक, मंजीरा पर भक्त अपनी श्यामा जू का जस गा रहे हैं।