झगड़ा कहीं खेत का है तो कहीं चकरोड का। ग्राम पंचायत की भूमि पर भी गोलियां चल चुकी हैं। यूं तो जमीन के झगड़े गांव-गांव में हैं लेकिन जिनमें आए दिन विवाद होता रहता है ऐसे मामलों की संख्या 2700 है।
शेरगढ़, बरसाना, नौहझील, वृंदावन और फरह में जमीन के झगड़े सबसे ज्यादा हैं। भूमि के झगड़े में एक साल के भीतर 32 लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। सोनभद्र में हुईं दस हत्याओं के बाद अब प्रशासन इन विवादों की निगरानी करने में जुट गया है।
जनपद में अगर ग्राम पंचायतों की बात की जाए तो 516 है, जबकि मजरों की संख्या 786 है। यूं तो हर गांव और मजरों में जमीन के विवाद चल रहे हैं लेकिन तहसील और एसडीएम कोर्ट से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2700 परिवारों में जमीन को लेकर दुश्मनी चली आ रही है। इनमें मुकदमे चल रहे हैं। कहीं मेड़ का विवाद है तो कहीं जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें आ रही हैं।
कुछ जगहों पर दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने के मामले चल रहे हैं। अब सोनभद्र में जमीनी रंजिश में 10 लोगों की हत्या के बाद इस प्रकार के मामलों की निगरानी की आदेश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने बताया कि जो मामले जमीनों के हैं उनका निस्तारण कराया जाता है। तहसीलों को भी अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस को भी चौकस किया गया है।
संपूर्ण समाधान दिवस में भी सबसे ज्यादा मामले जमीन के
मंगलवार को लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवस में सबसे ज्यादा मामले जमीनी विवाद के ही आ रहे हैं। किसी की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है तो किसी के खेत की मेड़ पड़ोसी ने काट ली है। इतना ही नहीं अफसरों के सामने पेश होने वाले फरियादियों में सबसे ज्यादा मामले जमीन के ही आ रहे हैं। अब शासन ने भी इस प्रकार के विवादों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर कराने को कहा है।