अभी पिछले महीने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्मशताब्दी समारोह मनाने वालों को शायद शहर के जुबली पार्क में फेंकी गई पंडित जी की प्रतिमा नजर नहीं आ रही है। या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनजान बन रहे हैं। पार्क में पड़ी इस प्रतिमा का सिर भी नहीं है।
केंद्र सरकार जहां पंडित दीनदयाल के नाम से तमाम योजनाएं चला रही है। हर सभा और मीटिंग में उनका गुणगान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक लोगों से पंडित जी की नीतियों का अनुसरण करने की अपील कर रहे हैं, वहीं उनके ही शहर में उनका अपमान हो रहा है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की एक प्रतिमा शहर के जुबली पार्क में पड़ी है। यह यहां कैसे पहुंची। किसने पहुंचाई इन सवालों का जवाब तो शायद ही किसी के पास होगा लेकिन इस पार्क के आसपास रहने वाले लोगों को बड़ा बुरा लगा। तभी खबर मीडिया तक पहुंची।
इन लोगों का तो यहां तक कहना था कि कई भाजपा नेताओं से भी वह इसका जिक्र कर चुके हैं। मगर किसी ने गौर ही नहीं किया। अगर प्रतिमा पुरानी भी हो गई है तो उसे कहीं सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया जाए। ऐसे फेंककर तो अपमान नहीं किया जाना चाहिए।