पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ आगरा में स्थापित करने तथा जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू किये जाने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन गुरुवार को और मुखर हो गया। वकीलों ने हाथ में पट्टिकाएं लेकर जुलूस निकाला और रेल रोकी। मुर्गा फाटक पर लगभग 20 मिनट तक ट्रेन के पहिये थमें रहे।
बार एसोसिएशन के बैनर तले आंदोलनरत अधिवक्ताओं ने गुरुवार की सुबह न्यायिक कार्य नहीं किया। वकीलों का हुजूम हाथ में नारे लिखी तख्तियां ‘वी वांट हाईकोर्ट,’ लेकर जुलूस के रूप में दीवानी न्यायालय गेट से निकला। इसके बाद अधिवक्ता मुर्गा फाटक पहुंचे और पटरी पर बैठकर धरना देने लगे।
लगभग 12 बजकर 15 मिनट पर कासगंज पैसेंजर ट्रेन के आते ही अधिवक्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और ट्रेन को रोककर इंजन पर चढ़ गये। पुलिस की मौजूदगी में 20 मिनट तक ट्रेन खड़ी रही। संचालन बार के सचिव प्रदीप कुमार शर्मा ने किया जबकि जुलूस का नेतृत्व बार अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर ने किया।
इस अवसर पर बार के उपाध्यक्ष अशोक कुमार पाठक, संयुक्त सचिव अरविंद कुमार सिंह, मधु गुप्ता, मयंक अग्रवाल, हुकुम चंद तिवारी, रामसरीन, मुकेश खंडेलवाल, राजेंद्र माहेश्वरी, भानु प्रताप सिंह, ठा.किशन सिंह, आदि उपस्थित रहे।
फाटक पर डटी रही पुलिस
अधिवक्ताओं के रेल रोको आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन भी खासा सतर्क रहा। मुर्गा फाटक के दोनों ओर पुलिस ने वाहनों का आवागमन रोक दिया। इस दौरान राहगीर रास्ता बदलकर दूसरे रास्तों से निकलते रहे।