सेवायतों का कहना है कि ट्रस्ट गठन और कॉरिडोर निर्माण की योजना मंदिर की आत्मा और उसकी धार्मिक परंपराओं से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मथुरा के वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी मंदिर में प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण और मंदिर ट्रस्ट के गठन की योजना पर विरोध शुरू हो गया है। सैकड़ों वर्षों से मंदिर की सेवा में जुड़े सेवायतों ने इसे अपनी परंपरागत सेवाओं और अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। बृहस्पतिवार शाम सेवायतों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और सरकार के इस कदम को अनुचित और अधिकारों का हनन बताया। सेवायतों का कांग्रेस ने भी साथ दिया है।
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सेवायतों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाएं पहले से ही सुचारू रूप से चल रही हैं और इसमें सरकारी हस्तक्षेप केवल विवाद और असंतोष को जन्म देगा। उनका स्पष्ट कहना है कि ट्रस्ट गठन और कॉरिडोर निर्माण की योजना मंदिर की आत्मा और उसकी धार्मिक परंपराओं से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विरोध कर रहे सेवायतों ने आगामी दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है और इसके लिए लगातार रणनीतिक बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत इस योजना पर पुनर्विचार करे और सेवायत समाज की भावनाओं का सम्मान करें।
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इस पूरे मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। मथुरा के पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने सेवायतों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा एक ओर हिंदुत्व की बात करती है, दूसरी ओर मंदिरों पर कब्जे की कोशिश करती है। अयोध्या की तरह अब वृंदावन को भी निशाना बनाया जा रहा है। परंतु यहां के सेवायत समाज की एकता सरकार की किसी भी योजना पर भारी पड़ेगी।