खारे पानी ने मांट की सेहत बिगाड़ दी है। मीठे पानी के लिए लोग परेशान हैं। तड़के ही महिलाएं शुद्ध पानी के लिए निकल पड़ती हैं। लेकिन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। हालांकि सियासी सभाओं में पानी का मुद्दा जोरशोर के साथ गूंजता है लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। लोगों का कहना है कि विधायक श्याम सुंदर शर्मा ने तो कभी इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।
पानी की किल्लत से जूझ रहा यह इलाका डार्क जोन में आता है। किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए भी भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। बिजली तो आती ही नहीं है। कभी दो घंटे मिल गई तो कभी तीन घंटे। किसान परेशान हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम ने मांट में लोगों से बात की तो सभी बोले कि विकास के नाम पर धोखा दिया जा रहा है। जाबरा के सत्यवीर सिंह, नरेंद्र, अरविंद, उमेश, राकेश कुमार, किरनपाल ने बताया कि जरा सी बरसात से गांव तालाब बन जाते हैं। लोग निकल भी नहीं सकते।
जाबरा से तहसील कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर बने मांट ब्रांच गंगनहर पुल की रेलिंग टूट चुकी है। नहर की पटरी का मार्ग भी टूटा हुआ है। जगह-जगह पटरी कटी पड़ी है। मांट को जाने वाला पुल काफी संकरा है। जाबरा से गोरई जाने वाले मार्ग में कई छोटे पुल बने हुए हैं लेकिन इन पुलों पर रेलिंग का नाम नहीं है। मांट ब्राच गंगनहर की पटरी से पपरेला के लिए जाने वाले मोड़ पर भी खंदी कटी हुई है। कई बार विधायक से कहा गया लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।
इन मार्गों का बुरा हाल
पपरेला से जाबरा होकर मांट जाने वाली सड़क
पानीगांव से मांट को आने वाला मार्ग
खायरा से राया तक टूटी पड़ी है नहर की पटरी
नगला बिंदा से वहादीन होकर राया-नीमगांव को जोड़ने वाला मार्ग
जाबरा से गांव आशा जाना वाला मार्ग
मांट ब्रांच गंगनहर की पटरी से पपरेला की ओर जाने वाला मार्ग
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टैंटीगांव में जर्जर रास्तों ने बढ़ाई टेंशन
पप्पू लवानियां
टैंटीगांव।
एक भी सड़क तो चलने के काबिल नहीं है। कहीं पानी भरा है तो कहीं गहरे गड्ढे हैं। पानी की भी बड़ी समस्या है। यहां के लोग हर बार चुनाव में समस्याएं विधायक के सामने रखते हैं लेकिन समाधान दावों तक ही सिमटकर रह जाते हैं। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम टैंटीगांव इलाके में पहुंची तो गांवों के लोगों ने कहा कि साहब आप ही गांवों की स्थिति देख लो विकास नाम पर एक भी कार्य नहीं हुआ है। 100 से अधिक गांव हैं। मतदाताओं की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर है। कहीं विकास नाम की चीज नहीं है। गांवों के खड़ंजों पर पानी भरा हुआ है।
गांव हरनौल, बीरबला, लक्ष्मणपुरा, सरकोरिया, नगला हरिया, बैकुन्ठपुर, नगला गढरिया, सामौली सहित करीब 24 गांव ऐसे हैं जहां मूलभूल सुविधाएं भी नहीं हैं। ग्रामीण कालीचरन लवानियां, हरिमोहन लवानियां, धर्मेंद्र, डोरी लाल, गुड्डू लवानियां, शिवकुमार लवानियां, पंकज गुप्ता, दंगल लवानियां, सुंदर लाल लवानियां ने बताया कि पानी का बड़ा संकट है। खारा पानी तो लोगों को बीमार बना रहा है। बिजली तो मिल ही नहीं पा रही है। कभी दो घंटे आ गई तो कभी तीन घंटे। अगर एक बार बिजली का तार टूट जाता है तो उसे जुड़ने में भी कई दिन लग जाते हैं। गांव लोहई, बेरा, जरारा, महमूदगढी, नगला जयसिंह, ईखू, मसंदगढी, चंदपुरा, राजगढी, तुलागढी, सुदामागढी गांवों के अशोक कुमार, गौरव, संजू, राजकुमार, चंद्रशेखर और राजेंद्र ने बताया कि जलभराव बड़ी समस्या है। सालों से रास्ते टूटे पड़े हैं। गांव हरनौल के ग्रामीण कारे सिंह, दुर्ग सिंह, बच्चू चौधरी, बीरी सिंह बंगाली का कहना है कि विधायक जी ने तो इधर मुड़कर भी नही देखा है। श्याम चौधरी ने बताया है कि बिजली विभाग को कई बार अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। टैंटीगांव के प्रधान अनिल वाल्मीकि का कहना है कि बिजली आपूर्ति इस समय चरमरा रही है।
ये संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त
टैंटीगांव से खैर मार्ग
टैंटीगांव से हरनौल
हरनौल से लक्ष्मनपुरा
हरनौल से नसीटी वाया र्सिएला
टैंटीगांव से कराहरी वाया पब्बीपुर
कराहरी से डडीसरा
खायरा से अमानुल्लापुर
झंडा से लोहई वाया कतीनना
बेरा से जरारा
टैंटीगांव से हरिया नगला वाया नगला गडरिया
राजागढी से तुलागढी