मोतीझील स्थित आनंद वृंदावन आश्रम में स्वामी अखंडानंद महाराज का 28वां आराधन महोत्सव बुधवार को संपन्न हो गया। इस अवसर पर संत-विद्वतजनों ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भागवताचार्य रमेश भाई ओझा ने कहा कि संत रूप में ही परमात्मा हमें संभालते हैं और परमात्मा पृथ्वी पर संत के रूप मेें दर्शन देते हैं। महंत श्रवणानंद ने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और तपस्या की प्रतिमूर्ति स्वामी अखंडानंद महाराज का जीवन हम सभी के लिए आदर्श है।
महंत सच्चिदानंद ने कहा कि सहनशीलता संत में सबसे बड़ा गुण है। डा. स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि ब्रह्मज्ञान से ब्रह्मनिष्ठा कठिन है। डा. रामकृपाल त्रिपाठी ने कहा कि संत की कृपा सत्संग से प्राप्त होती है।
इससे पूर्व चैतन्य संप्रदायाचार्य पुरुषोत्तम गोस्वामी को ज्ञान-विज्ञान संपन्न अनुभव वृद्ध ब्रजविभूति सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मान उनके पुत्र आध्यात्मिक गुरु श्रीवत्स गोस्वामी ने प्राप्त किया।
आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य गुरुदेव की चरण पादुकाओं का पूजन-अर्चन कराया। इस अवसर स्वामी महेशानंद सरस्वती, सेवानंद ब्रह्मचारी, शारदानंद सरस्वती, स्वामी गिरीशानंद, स्वामी प्रज्ञानानंद, स्वामी विश्वात्मानंद आदि उपस्थित रहे।