मथुरा। अब दुर्बल वर्ग के छात्रों के निजी स्कूल में प्रवेश के लिए केवल छात्रों के नाम ही नहीं, बल्कि उनके संबंधित दस्तावेज (आय प्रमाण पत्र) भी उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही सभी शासनादेशों का पालन भी करना होगा। यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
हाईकोर्ट ने मथुरा के साथ ही सभी बीएसए और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित करने के लिए सचिव शिक्षा को आदेश दिया है। सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन और एसोसिएशन के मुख्य सचिव संजय पाठक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार समेत तीन को प्रतिवादी बनाया गया था। इसमें बताया था कि दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश के नाम पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
अधिकारियों द्वारा सीधे निजी स्कूलों को प्रवेश के लिए बच्चों की सूची भेज दी जाती है। उनके सत्यापन के लिए कोई अभिलेख नहीं दिए जाते हैं। अगर अभिलेख दिए जाएं तो उसकी सत्यता जांची जा सकती है कि वे वास्तविक पात्र हैं या नहीं। सत्यापन होने से वास्तविक पात्र लाभ से वंचित हो रहे हैं। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में प्रतिवादियों को शपथ पत्र दाखिल करने का समय दिया है।
हाईकोर्ट ने मथुरा के जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को दुर्बल वर्ग के छात्रों की सूची के साथ उनके अभिलेख संबंधित निजी स्कूलों को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। शिक्षा सचिव को भी सभी बीएसए और जिला विद्यालय निरीक्षकों को इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की गई है।
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शुल्क प्रतिपूर्ति बढ़ाने की भी की गई है मांग
एसोसिएशन ने याचिका में दुर्बल वर्ग के बच्चों को शिक्षित किए जाने के लिए सरकार की ओर से की जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति भी बढ़ाने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने देश के अन्य प्रदेशों में लागू शुल्क प्रतिपूर्ति का भी हवाला दिया है।