फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनाव से पहले ट्रांसफर होंगे ‘बैरकों के डॉन’

Tue, 20 Sep 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
विज्ञापन
जेल में महिला - फोटो : demo pics
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव से पहले ‘बैरकों के डॉन’ शिफ्ट किए जाएंगे। इसके लिए कसरत अभी से शुरू कर दी गई। पहली लिस्ट उन बंदियों की तैयार हो रही है जो अपना सियासी दखल रखते हैं। अक्तूबर के अंत से इनकी शिफ्टिंग शुरू होनी है। वहीं दूसरी सूची उन बंदियों की बन रही है जो जेल की शांति को खतरा बने हैं। उनके रहने से हालात बिगड़ सकते हैं।
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश में 67 जिला कारागार हैं। इन सभी जेलों में तमाम बंदी ऐसे हैं जो अपने-अपने इलाकों में खासा सियासी दखल रखते हैं। मतदान के दौरान इनकी उस क्षेत्र के कारागार में मौजूदगी इलेक्शन की शांति को प्रभावित कर सकती है।

इनके साथी वोटरों को धमकाकर अपने किसी खास के पक्ष में पोलिंग को दबाव बना सकते हैं। लिहाजा निर्वाचन आयोग की नियमावली पर इलेक्शन से पहले इनके ट्रांसफर के लिए कागजी कवायद शुरू हो गई है। 
विज्ञापन


सभी जिला कारागार से बंदियों के बारे में जानकारी करने के बाद मुख्यालय ने सूची तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से इनकी शिफ्टिंग शुरू हो जाएगी। गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, गोरखपुर, कानपुर, इलाहाबाद और आजमगढ़ में ऐसे बंदियों की संख्या सबसे ज्यादा है। पूर्व विधायक और दूसरे रसूखदार बंदी यहां हैं।

इन जेलों में इन्हीं का सिक्का भी चलता है। जेल प्रशासन का कहना है कि इनसे मुलाकात करने आने वालों की संख्या भी हर रोज सैकड़ों में रहती है। इससे जेल की व्यवस्था भी कई बार प्रभावित हो जाती है। 
वहीं जेल की शांति को खतरा बने बंदियों की भी सूची तैयार की जा रही है।

सभी जेल अधीक्षकों को मुख्यालय स्तर से आदेश जारी किया गया है कि वह जिलाधिकारी के माध्यम से ऐसे बंदियों की सूची भिजवाएं जो जेल का माहौल खराब कर रहे हैं। झगड़ालु हैं। बेवजह हंगामा करते हैं। ताकि उन्हें किसी दूसरी जेल में शिफ्ट किया जा सके। 

एडीजी जेल गोपाल लाल मीणा ने बताया कि बंदियों का ट्रांसफर एक रुटीन प्रक्रिया है। दो तरीके से बंदियों को शिफ्ट किया जाता है। जो बंदी अंडर ट्रायल होते हैं वह शासन के आदेश पर स्थानांतरित किए जाते हैं जबकि सजायाफ्ता को प्रक्रिया के तहत शिफ्ट किया जाता है। जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान की रिपोर्ट पर बंदियों की जेल बदल दी जाती है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें