मथुरा। भाजपा के महानगर अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर नयति हॉस्पिटल में हुई मारपीट की घटना को स्पष्ट किया। साथ ही उन्होंने शासन और प्रशासन से अस्पताल में अनावश्यक इलाज का ऑडिट कराने की मांग की है।
वहीं दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की भी बात उठाई है। उन्होंने कहा कि आगामी किसी भी दुर्व्यवहार की पुनरावृत्ति होने पर वे जागरूक सामाजिक नेतृत्वकर्ता के नाते आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
पांच जनवरी को नयति हॉस्पिटल में भाजपा महानगर अध्यक्ष विनोद अग्रवाल और सुरक्षाकर्मियों में मारपीट हो गई थी। बुधवार को प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि वह पांच जनवरी को बाथरूम में गिरकर बेहोश हुए धेवते को देखने के लिए अस्पताल गए थे।
इस दौरान वह रिसेप्शन एरिया में बेेटी से बात करने लगे। इसी दौरान वहां पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने उनसे अभद्रता करने लगे। समझाने पर वे हमलावर हो गए थे। उन्होंने कहा कि यदि वे अब भी शांत रहे तो शोषित लोगों का मनोबल टूटेगा। इसलिए पार्टी ने तय किया है कि हॉस्पिटल की मनमानी का विरोध किया जाएगा।
इस मौके पर पूर्व विधायक श्याम सिंह अहेरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष नगेंद्र सिकरवार, प्रदीप गोस्वामी, श्याम चतुर्वेदी, सुरेंद्र निषाद, राजवीर सिंह, ज्ञानेंद्र शर्मा, चंद्रपाल सिंह, दीपेंद्र चतुर्वेेदी, गंभीर सिंह, वीरेंद्र बजाज आदि मौजूद थे।
सभी मरीज और परिजन से साथ समान व्यवहार : नयति
मथुरा। मामले में नयति मेडिसिटी के प्रवक्ता पीके कोहली ने बताया कि यहां सुरक्षाकर्मी पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करते हैं। वे हर किसी वीआईपी को पहचानते भी नहीं हैं। यहां आने वाले किसी भी मरीज अथवा परिजन के साथ उनका समान व्यवहार रहता है।
विनोद अग्रवाल का धेवता आपातकालीन विभाग में 5 जनवरी की सुबह 11:10 बजे बेहोशी की हालत में लाया गया था। कुछ देर बाद ही वे अपने साथियों के साथ आये और धेवते को देखने के लिए आपातकालीन विभाग के अंदर जाने लगे। वहां खड़े सुरक्षाकर्मी ने उनसे कहा कि अंदर आपके मरीज के साथ 10 से 12 लोग मौजूद हैं।
उनमें से कुछ लोग बाहर आ जाएं तो आप अंदर चले जाइएगा। इसके बाद वे भड़क गए थे। वंश को 7 जनवरी की शाम को बिल्कुल ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। यह जानकर काफी कष्ट हुआ कि धेवते के बिल्कुल स्वस्थ होकर घर जाने के दूसरे दिन ही नगर अध्यक्ष ने नयति के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की।