लगा कि जैसे सारा ब्रज यहीं हैं। विश्व धरोहर दिवस पर राजकीय संग्रहालय में अमर उजाला की शृंखला ‘रस ब्रज रज कौ’ का अवलोकन करने के बाद प्रबुद्ध वर्ग ने यह कहा। कान्हा और किशोरी की लीला स्थलियों और प्राचीन मंदिरों की शब्द यात्रा कराती इस ब्रज परिक्रमा को राजकीय संग्रहालय ने ऐसे सजाया था कि प्रशासनिक अधिकारी भी कहने लगे यहां वाकई ब्रज रस का अनुभव हो रहा है।
अमर उजाला ने एक साल से अधिक समय तक 378 कड़ी वाली शृंखला ‘रस ब्रज रज कौ’ प्रकाशित की थी। इसके एक भाग का प्रदर्शन शनिवार से राजकीय संग्रहालय में एक धरोहर के रुप में प्रारंभ हो गया है। चार दिन तक लगने वाली प्रदर्शनी का शुभारंभ एडीएम वित्त एवं राजस्व धीरेंद्र सचान और एसडीएम सदर राजेश कुमार ने किया।
एडीएम सचान ने कहा कि तीन लोक से न्यारी मथुरा की गणना सप्तमोक्ष प्रदायिनी पुरियों में की जाती है। अमर उजाला ने इस शृंखला में ब्रज के पौराणिक महत्व के ऐसे स्थलों से हमें परिचित कराया जिन्हें हम देखकर भी नहीं जान पाते थे। एसडीएम सदर राजेश कुमार ने कहा कि अमर उजाला ने ब्रज विरासत पर लीक से हटकर कार्य किया है। सच में यही पत्रकारिता है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह का संचालन कर रहे संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने कहा कि शृंखला की 378 कड़ी का एक साथ प्रदर्शन संभव नहीं है। इसे तीन चरणों में प्रदर्शित किया जाएगा। शुरुआत विश्व धरोहर दिवस पर की गई है। इस मौके पर डा. प्रेमदत्त मिश्रा, डा. ताराचंद्र शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, गिर्राज प्रसाद, डा. कन्हैया लाल पांडेय, डा. एसपीएस चौहान, डा. बच्चू सिंह वर्मा, डा. महिपाल सिंह, प्रो. रणधीर सिंह, चंद्रशेखर शर्मा आदि मौजूद थे।