वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को भक्ति मार्ग में विरोध और अपमान सहने की सीख दी है। उन्होंने यह बात यमुना विहार कुंज स्थित अपने नए आश्रम में कही, जिसका वीडियो सोशल मीडिया मंच पर प्रसारित हुआ। यह सीख उनके एक शिष्य की आत्महत्या के बाद उठे आरोप-प्रत्यारोप के बीच आई है।
महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति का मार्ग विचित्र है और इसमें धैर्यवान होना आवश्यक है। जब भगवान किसी से प्रेम करते हैं, तो उसकी प्रतिकूलता की कसौटी होती है। उन्होंने मीरा बाई और भक्त प्रहलाद के उदाहरण दिए, जिन्हें कष्ट सहने पड़े। संत ने कहा, प्रतिकूलता, निंदा एवं अपमान वो पुष्प हैं, जिससे पता चलता है कि भगवान हृदय में सुगंध रूप में प्रकाशित होने वाले हैं। इसे सहना बहुत कठिन है। जब निर्दोष होने पर समाज में तिरस्कार, निंदा और अपमान होने लगे, तो यह भगवान की विशुद्ध कृपा मानी जाती है। भक्ति के मार्ग पर वही उन्नति करता है जो प्रतीक्षा और सहनशीलता धारण करता है। कितनी भी प्रतिकूलता हो, वह व्याकुल नहीं होता और अश्रद्धा का भाव नहीं लाता।
प्रतिकूलता में धैर्य का महत्व
यह वीडियो उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या के बाद जारी हुआ था। इस घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप और विरोध के स्वर मुखर हुए थे। महाराज ने कहा, जब जीवन अपने प्रिय ठाकुर को अर्पित कर देते हैं, तो हम कठपुतली बन जाते हैं। हमें शरणागत रहना चाहिए और अपनी बुद्धि प्रभु के चरणों में समर्पित कर देनी चाहिए।
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उड़िया बाबा महाराज के उपदेश
उन्होंने संत उड़िया बाबा महाराज के 20 उपदेशों का भी जिक्र किया। इन उपदेशों को जीवन में उतारने से भगवान का प्यार प्राप्त होता है। इनमें सत्य बोलना, किसी की निंदा न करना और दूसरों की कमी न बताना शामिल है। परोपकार की भावना रखने और कठोर भाषा का प्रयोग न करने पर भी जोर दिया गया। गलत रास्तों से आए धन से बचने और अपनी कमाई का ही प्रयोग करने की सलाह दी गई।