सरकार मां और शिशु की जीवन रक्षा के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही है। प्रोत्साहन के लिए धनराशि दी जा रही है लेकिन अस्पतालों के प्रसव कक्ष में गर्भवती को एक्सपायरी दवाएं मिल रही हैं। ये घोर लापरवाही चौमुंहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर संयुक्त निदेशक के आकस्मिक निरीक्षण में सामने आई हैं। रिपोर्ट से इनका खुलासा हुआ है।
बीते दिनों संयुक्त निदेशक आगरा मंडल डा. प्रदीप शर्मा और डा. प्रकाश चंद्र शर्मा ने चौमुंहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण आख्या में बताया गया है कि प्रसव कक्ष में घोर लापरवाही उजागर हुई। यहां आवश्यकता पर गर्भवती महिला को दी जाने वाली आरएल की बोतल जनवरी माह में ही एक्सपायर हो चुकी थी।
इतना ही नहीं कक्ष में बेबी के लिए कोई औषधि उपलब्ध नहीं थी। एक आक्सीजन सिलेंडर था लेकिन रिंच के अभाव में ये ही पता नहीं चल सका कि उसमें गैस है या नहीं। कक्ष में इमरजेंसी ट्रे तो थी लेकिन उसमें कोई औषधि नहीं थी। इसके अलावा यहां कई जीवन रक्षक उपकरण खराब मिले। मामले पर गंभीर जांच के लिए अधिकारियों ने स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मुख्य चिकित्साधिकारी और जिला क्षय रोग अधिकारी को सौंपी है।
प्रसूताओं को नहीं दिया जा रहा भोजन
जांच अधिकारियों ने अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं से सीधे बात की। इसमें महिलाओं ने बताया कि उन्हें केवल चाय और बिस्किट का नाश्ता दिया जा रहा है। जबकि सरकार ने प्रसूताओं के लिए भोजन की व्यवस्था भी की है। आख्या में इस बिंदु को भी प्रमुखता के साथ उठाया गया है।
ये मिली खामियां
- आरएल की बोतल जनवरी 2016 में हो चुकी थी एक्सपायर
- नर्स ने बताया कि रेडियंट वार्मर, नेबूलाइजर क्रियाशील नहीं है
- फुट ऑपरेटिड सक्शन मशीन और फीटल डॉप्लर खराब थे
- कक्ष में बेबी कार्नर, बेबी ट्रे ही नहीं मिली
- नवजात के लिए कक्ष में कोई औषधि उपलब्ध नहीं मिली