शहर में गंदे पानी को शोधित करने के लिए मात्र 43 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं और उत्सर्जन का आंकड़ा 85 एमएलडी को पार कर गया है। ऐसे में नालों का गंदा पानी सीधा यमुना में समा रहा है।
कोढ़ में खाज ये है कि इन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), सीवेज पंपिंग स्टेशनों (एसपीएस) का संचालन भी कागजों में ही सिमटकर रह गया है। ऐसा तब है जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर यमुना प्रदूषण की निगरानी हो रही है।
इसके लिए यहां एक एडीएम को नोडल अफसर बनाया गया है। पिछले कई माह से सरकारी रिकार्ड को छोड़ एसटीपी और एसपीएस बंद पडे़ हैं। इसकी जिम्मेदारी संभाले अफसरों ने शहर के सीवर और नालों का पानी सीधे यमुना में छोड़ दिया है।
15 माह से नहीं हुई यमुना कार्ययोजना की बैठक
यमुना प्रदूषण को लेकर अफसरों की लापरवाही का आलम ये है कि बीते पंद्रह माह से यमुना कार्ययोजना की बैठक ही नहीं बुलाई है। जबकि हाईकोर्ट का आदेश प्रतिमाह बैठक बुलाने के साथ ही संपूर्ण कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का है। याचिकाकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि बीती बैठक 9 सिंतबर, 2014 को हुई थी, इसके बाद 23 जनवरी 2016 को बैठक का नोटिस मिला है।
तीन एसटीपी, दस एसपीएस
मथुरा में यमुना पार में 13.5 एमएलडी, 16 एमएलडी के दो एसटीपी और मसानी पर 14.5 एमएलडी का एसटीपी है। इसके अलावा कुल दस सीवेज पंपिंग स्टेशन हैं। कैंट, अंबाखार, बंगालीघाट, स्वामी घाट, विश्राम घाट पर दो, चिंताहरण महादेव, किशन गंगा, वृंदावनगेट और मसानी पंपिंग स्टेशन।
आंदोलनकारियों में बढ़ रहा रोष
पंकज बाबा
पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा का कहना है कि यमुना में प्रदूषण को लेकर उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश हैं इसके बावजूद शहर के नाले सीधे यमुना में गिर रहे है। यमुना आंदोलन के बाद सरकारी वादे महज कागजी साबित हो रहे हैं। ये कष्ट की बात है।
राधाकांत शास्त्री
यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री कहते हैं कि यमुना इतनी पवित्र है कि इसमें शोधित जल भी नहीं गिरना चाहिए इसके लिए हमने यमुना में समानांतर नालों को बनाने की बात कही है। हमारी निगाहें एनजीटी पर लगी हैं।
संत जयकृष्ण दास
यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयकृष्ण दास कहते हैं कि जब तक यमुना के दोनों किनारों पर समानांतर नालों का निर्माण नहीं होगा तब तक यमुना में जाने वाली गंदगी को रोका नहीं जा सकता है। प्रदेश और केंद्र सरकारों को इस योजना पर अमल करना चाहिए।
वृंदावन में भी एसटीपी, पंपिंग स्टेशन की सेहत खराब
यहां पागलबाबा एसटीपी आंशिक रूप से ही काम कर रहा है। कालीदह घाट, ज्ञान गुदड़ी घाट, बिहार घाट, बड़ा बगीचा पर छोटे पंपिंग स्टेशनों के हालात अच्छे नहीं हैं। ज्ञान गुदड़ी घाट का पंपिंग स्टेशन पूरी क्षमता से कार्य नहीं कर रहा। कालीदह पर तो कई महीने से निर्माण कार्य चल रहा है। अन्य भी ठप पड़े हैं। इन छोटे पंपिंग स्टेशन से सीवेज मुखर्जी पार्क स्थित बड़े पंपिंग स्टेशन पर प्रवाहित किया जाता है। इन पंपिंग स्टेशन और एसटीपी के संचालन का ठेका प्रतिमाह लगभग दो लाख रुपये पर एक निजी फर्म को उठाया हुआ है।
धर्मनगरी 15 नाले सीधे गिर रहे
वृंदावन और आसपास के कई गांवों और वृंदावन शहर का दूषित पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। गांव बाबूगढ़ का बड़ा नाला, वाराह घाट, जुगल घाट, कालीदह घाट, बिहार घाट, शृंगार वट, केशीघाट, भौंराघाट, ज्ञान गुदड़ी घाट, चीरघाट, टिकारी घाट, श्मशान घाट, वंशीवट, गौरानगर कालोनी, अक्रूर के नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं।