पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में छाता, नंदगांव और चौमुंहा विकास खंड के गांवों में लोकतंत्र का उत्सव (मतदान) मनाया जा रहा था। इसी बीच इसी क्षेत्र के गांव उझानी के बूथों पर सन्नाटा पसरा था। यहां के ग्रामीणों ने एकजुटता के साथ चुनाव का बहिष्कार किया। इसकी वजह गांव के सूखा और ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि न मिलने के साथ ही जनसमस्याओं के प्रति प्रशासन की बेरुखी को बताया गया।
गांव में प्रवेश के साथ ही ग्रामीण देवराज से पोलिंग बूथ की जानकारी मांगी तो तपाक से जवाब मिला कि यहां कोई वोट नाय गेर रहौ। वजह पूछने पर ग्रामीणों के चेहरे पर आक्रोश छा गया। बोले कि गांव में सूखा और ओलों ने कहर बरपाया, सरकार ने मुआवजे का भरोसा दिलाया लेकिन दो साल हो गए एक भी किसान को धेला नहीं मिला है।
बूथ से ठीक पहले नौहरे में सरदारी बैठी थी, यहां ग्रामीणों ने एक स्वर से कहा कि गांव में दो घंटे बिजली आ रही है, किसान का मर जायै। सालों से सड़क नहीं बनी, एक भी ग्रामीण को मुआवजा नहीं मिला। अफसर सिर्फ आश्वासन देकर निकल जाते हैं ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं है। इन्हीं समस्याओं के चलते हमने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस बाबत प्रशासन को भी अवगत करा दिया।
बहिष्कार की सूचना पर गुरुवार की रात को एसडीएम छाता राम अरज यादव और सीओ छाता विपुल कुमार गांव पहुंचे और ग्रामीणों से मतदान करने की अपील की लेकिन ग्रामीण बिना मुआवजे का चेक लिए मतदान करने के लिए राजी नहीं हुए।
गांव निवासी मोमराज ने कहा कि अफसर सिर्फ आश्वासन देते है। यहां मुआवजे का एक धेला नहीं मिला। कई बार लिखा-पढ़ी की मुख्यालय पर जाकर अफसरों से फरियाद भी की लेकिन हर बार समझा-बुझाकर शांत कर दिया जाता है। अफसरों के रवैये से परेशान होकर ही बहिष्कार का निर्णय लिया है।
ग्रामीण कुंवरपाल बोले कि और गांव वाले क्या करें आप ही बताइए। यहां बिजली सिर्फ दो घंटे आती है। डीजल से खेतों में सिंचाई करनी पड़ रही है। बच्चे पढ़ नहीं पा रहे है। हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन नहीं सुनते हैं।
युवा ग्रामीण रामखिलाड़ी भी बहिष्कार को जायज ठहराते हैं। बोले कि जब कोई सुनेगा नहीं तो फिर गांव के लोग अपने गुस्से का इजहार तो करेंगे ही। गांव वालों ने पहले ही बहिष्कार के बारे में बता दिया था, इसके बाद अफसर तो आए लेकिन समस्याओं के समाधान के बिना।
2100 वोटों के लिए बनवाए थे तीन बूथ
2100 ग्रामीणों के वोट डलवाने के लिए यहां दोनों विद्यालयों में तीन बूथ बनाए गए। बूथ 102 के पीठासीन अधिकारी मोहम्मद हकीमुद्दीन ने बताया कि उनके बूथ पर 530 वोट हैं। एक भी ग्रामीण वोट डालने नहीं आया। उनके साथ मतदान अधिकारी मालविका शर्मा, ललित कुमार, वीरेन्द्र सिंह पूरे दिन मतदाताओं का इंतजार करते रहे। बूथ संख्या 101 पर 1080 वोट हैं। पीठासीन अधिकारी हेमेन्द्र कुमार टीम के साथ पूरे दिन खाली बैठे रहे। यहीं हाल बूथ संख्या 103 का रहा। इस बूथ पर 692 वोट हैं। पीठासीन अधिकारी हंसाराम ने बताया कि एक भी मतदाता वोट डालने नहीं आया। कुछ ग्रामीण युवा वोट करने आए लोगों को रोकते रहे।