छाता शुगर मिल आंदोलन में पुलिस कर्मियों पर चप्पल मारने का प्रयास करती महिलाएं।
मथुरा। छाता शुगर मिल को चालू कराने की मांग के लिए चल रहा धरना मंगलवार को उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों के हाथों से जनप्रतिनिधियों का पुतला छीनते ही मौके पर मौजूद महिलाएं भी आक्रोशित हो गईं। महिलाओं ने एक हाथ से घूंघट संभालते हुए पुलिसकर्मियों पर चप्पलें चला दीं। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने हाथ आगे कर चप्पल से बचाव किया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने दुर्गानवमी और दशहरे का हवाला देते हुए महिलाओं को समझाने का प्रयास किया।
छाता शुगर मिल करीब 18 साल पहले बंद हो गई थी। इसे दोबारा चालू कराने के लिए पूर्व सैनिकों और किसानों ने कई बार जनप्रतिनिधियों के सामने मांग उठाई। किसानों की मांग पर मिल को शुरू कराने की घोषणाएं भी हुईं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मिल चालू नहीं हो सकी। इस बार मिल को शुरू कराने की मांग ने जोर पकड़ा और लोगों ने मिल के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सरकार ने चीनी मिल को तीन चरणों में शुरू करने की घोषणा की। पहले चरण में यहां एथेनॉल प्लांट चालू किया जाना है। सरकार की इस योजना पर प्रदर्शनकारियों ने असहमति जताई। उनकी मांग है कि पहले चीनी का उत्पादन शुरू किया जाए। इसके बाद ही एथेनॉल और बिजली उत्पादन से जुड़े प्लांट चालू किए जाएं। इसके बाद 21 सितंबर को पुलिस द्वारा धरना हटाने की कोशिश किए जाने पर प्रदर्शनकारी भड़क गए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के साथ महिलाओं के पहुंचने पर पुलिस-प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
तब से धरनास्थल पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी। दशहरे से एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों का पुतला लेकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी और आगजनी की घटनाओं से बचने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। एहतियातन धरनास्थल पर पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई।
मंगलवार को पुलिस ने जैसे ही प्रदर्शनकारियों से पुतला छीना, मौके पर मौजूद महिलाएं भड़क गईं। घूंघट संभालते हुए महिलाएं हाथों में चप्पलें और डंडे लेकर पुलिसकर्मियों के सामने आ गईं। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने चप्पल से बचने के लिए हाथ आगे कर लिया। स्थिति को बिगड़ता देख एसपी देहात आलोक राज नारायण ने खुद मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।
उन्होंने दुर्गानवमी और दशहरे का हवाला देते हुए महिलाओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व सैनिक सूबेदार ललित कुमार के आश्वासन के बाद पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली।