राजनीति में दखल रखने वाले शातिर अपराधी पंचायत चुनाव के दौरान शांति प्रक्रिया को खतरा पहुंचा सकते हैं। इसलिए पहले के चुनावों में हुई वारदातों को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस बार सतर्कता बरत रही है। जिसके तहत जेल से जमानत पर बाहर आए अपराधियों की सूची बनाने के बाद पुलिस ने 110 लोगों की जमानत खारिज कराने की गुहार न्यायालय के सामने लगाई है।
चुनावी हिंसा के लिहाज से पंचायत चुनाव सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के लिए सीमित वोटर और प्रत्याशियों के अनुपात के हिसाब से पहले से ही हार-जीत का गणित शुरू हो जाता है। ऐसे में वोटरों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए शराब बंटवाना, डराना धमकाना और विरोधियों के साथ झगड़ा जैसे कई मामले पूर्व में देखे गए हैं।
प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए अवैध शराब और हथियारों की आपूर्ति से भी चूकते हैं। इन कार्यों के लिए अधिकतर अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का सहारा लिया जाता है। इनमें से अधिकतर वे अपराधी होेते हैं जो जमानत या पैरोल पर जेल से बाहर आ जाते हैं। पुलिस ने इस बार इससे निपटने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। पूर्व के चुनावों में हुई घटनाओं को देखते हुए अपराधियों की सूची तैयार की गई है।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार इस वक्त इस तरह के 110 अपराधी जेल में थे और वे इस वक्त जमानत पर हैं। पुलिस ने इन अपराधियों को चुनावी प्रकिया में बाधा मानते हुए उनकी जमानत खारिज कराने की गुहार न्यायालय से लगाई है। इसमें जनपद में सभी 20 थाना क्षेत्रों के अपराधियों की सूची कोर्ट को सौंपी गई है।
जिले में पूर्व में हुए पंचायत चुनाव में कुछ अपराधियों द्वारा चुनाव प्रक्रिया में बढ़चढ़ कर भाग लिया था और मारपीट व लोगों को धमकाने की शिकायत मिली थीं। अब वे अपराधी जमानत पर हैं। शांति प्रक्रिया बनी रहे इसे लेकर न्यायालय से 110 अपराधियों की जमानत खारिज करने की सिफारिश की गई है।
डा. राकेश सिंह
एसएसपी, मथुरा