स्वामी हरिदास जी की साधनास्थली पर भव्य सजावट
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के मथुरा में ब्रज संस्कृति संगीत समिति के तत्वावधान में श्रीहित हरिवंश महाप्रभु प्राकट्योत्सव, श्रीहित आसुदाराम सेवाकुंज रसोत्सव और अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव के अंतर्गत भावांजलि का आयोजन किया गया। यह आयोजन वृंदावन के सेवाकुंज प्रांगण में हुआ।
समारोह में शनिवार को पार्श्व गायिका साधना सरगम ने संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी के समक्ष ब्रज के रसिकाचार्यों की पदावलियों का गायन कर समा बांध दिया। उन्होंने आज पहली बार ब्रज की वाणियों का गायन शास्त्रीय शैली में किया। जिसे सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। साधना सरगम ने हरित्रयी के पदों का गायन किया।
श्रोता भावविभोर होकर करने लगे नृत्य
इनमें साधना ने मेरो राधावल्लभ प्यारो हरिवंश, माई री सहज जोरी प्रकट भई और हित तो कीजै कमल नैन सों, मेरो राधावल्लभ लाल मन रखियो अपने चरनन में, तन रखियो श्रीवृंदावन में, अनुपम माधुरी जोरी हमारे श्याम श्याम की, मेरो मग जोबत लाल बिहारी, श्यामा प्यारी कुंजबिहारी जैसी कृतियों का गायन विविध परंपरागत शास्त्रीय रागों में सुनकर श्रोता भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
इन लोगों ने लिया हिस्सा
महोत्सव में साधना ने ब्रज रसिक जेएसआर मधुकर के साथ रसिकाचार्यों की कई पदावलियों पर शास्त्रीय जुगलबंदी कीं। बांसुरी पर विनय प्रसन्ना ने संगत की। महोत्सव में सेवायत भीकचंद्र गोस्वामी, दान बिहारी खंडेलवाल, शशि सखी, भावना सखी, रिमझिम, सिद्धार्थ पालो, सुरेन्द्र कोहली, चेतन दीक्षित आदि थे।