गोवर्धन में मानसी गंगा सहित चार प्राचीन कुंडों के प्रदूषित जल को कुवैत का बैक्टीरिया शुद्ध करेगा। इसके लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने इंटेक से अनुबंध किया है। यह एजेंसी एक साल तक काम करते हुए विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित करेगी।
गोवर्धन में मानसी गंगा के साथ राधाकुंड, श्याम कुंड, गोविंद कुंड का धार्मिक महत्व है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग का हिस्सा इन कुंडों में लाखों भक्त आचमन और स्नान करते हैं। मानसी गंगा का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। लेकिन मानसी गंगा सहित इन सभी कुंडों के जल की हालत खराब है। पानी प्रदूषित है।
इससे यहां आने वाले श्रद्धालु आचमन से भी बचते हैं। खास धार्मिक पर्वों पर ही यहां आचमन और स्नान किया जाता है। इस स्थिति को बदलने के लिए मानसी गंगा पर जल निगम ने काम भी किया गया है लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं आया।
ऐसी स्थिति में मानसी गंगा सहित राधाकुंड, श्याम कुंड, गोविंद कुंड के प्रदूषित जल को स्वच्छ बनाने के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने इस क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसी इंटेक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) के साथ अनुबंध किया है।
प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए काम करने वाली यह संस्था एजेंसी आगरा में कई प्रोजेक्ट पर काम कर चुकी है। इंटेक से भगवान सिंह ने बताया कि प्रदूषित जल को शुद्ध करने में एक विशेष बैक्टीरिया का उपयोग किया जाता है। यह बैक्टीरिया कुवैत से लाया जाता है। यह प्रदूषित जल में गंदगी को खाकर पानी को स्वच्छ बनाने में सहयोगी है।
गोवर्धन परिक्रमा से जुड़े चार प्राचीन कुंडों के लिए इंटेक से अनुबंध किया गया है। यह एजेंसी मानसी गंगा सहित चार कुंडों में प्रदूषित जल को शुद्ध करने का काम करेगी। इस पर करीब 30 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। यह एजेंसी एक वर्ष तक खुद काम करते हुए भविष्य के लिए एमवीडीए के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके जाएगी।
नगेन्द्र प्रताप, उपाध्यक्ष, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण