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वैदिक मंत्रों के साथ यमुना घाट पर हुआ सामूहिक तर्पण

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मथुरा। पूर्णिमा के अवसर पर यमुना में दुग्धाभिषेक करते श्रद्धालु। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। श्राद्ध पक्ष के प्रथम दिन लोगों ने श्रद्धाभाव से पितृों को तर्पण कराया। इसके बाद पितृ स्वरूप ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन कराया।
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पंडित अमित भारद्वाज के अनुसार श्राद्ध में तर्पण का विशेष महत्व है, बिना तर्पण जल दान के श्राद्ध पूर्ण नही होता। व्यक्ति को प्रतिदिन गौ ग्रास निकालने के बाद नदी या पवित्र सरोवर पर योग्य आचार्य पंडित के निर्देशन में तर्पण अवश्य करना चाहिए।
श्राद्ध की तिथि के दिन ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद तर्पण का विधान है। तर्पण में पहले देव तर्पण, फिर ऋषि तर्पण तत्पचात् पितृ तर्पण किया जाता है। इसके लिए यमुना के कई घाटों पर आचार्य की व्यवस्था रहती है, जो लोग इस क्रिया से अनभिज्ञ है वह इस व्यवस्था का लाभ ले सकते हैं।
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शुक्रवार को मथुरा के असकुंडा घाट पर पितृ पक्ष की पूर्णिमा को लोगों ने चंद्रशेखर गोस्वामी के आचार्यत्व में वैदिग मंत्रोच्चारण के मध्य तर्पण किया गया। यहां अमावस्या तक तर्पण के लिए प्रात 8 से अपराह्न 3 बजे तक आचार्य की व्यवस्था है। बताया कि श्राद्ध के दृव्य तिल, उड़द, जौ, चावल, जल, कंदमूल, फल व घृत है। तिल व उड़द की दाल का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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इमरतियों की खूब हुई बिक्री
पहले ही दिन इमरतियों की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ लगी रही। श्राद्ध में उड़द की दाल के महत्व के चलते भोजन में इमरती की अनिवार्यता हो जाती है। इसके चलते हलवाइयों की दुकानों पर इमरती खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।
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