मथुरा। साखरी खोर की संकरी गली में कान्हा मटकी को फोड़ते हुए।
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बरसाना (मथुरा)। तू सुंदर, तेरी मटकी सुंदर, नेक खट्टा-मीठा चखाय दीजौ...इन रसिक पदों की गूंज के बीच शुक्रवार को बरसाना की सांखरी खोर की संकरी गली द्वापर कालीन लीला से सराबोर हो उठी। चित्रा सखी के गांव चिकसोली में आयोजित माखन दान लीला में नटखट कान्हा ने सखियों से दही का दान मांगा। जब सखियों ने टालमटोल की तो कान्हा ने अपने सखाओं संग उनकी मटकी फोड़ दीं। मटकी फूटते ही दही की धार बह निकली और श्रद्धालु प्रसाद पाने को टूट पड़े।
सुबह से ही कान्हा की बाल लीलाओं का दौर शुरू हो गया। मान्यता है कि इस दिन नंदकिशोर हर घर माखन खाने जाते हैं। इस दौरान बरसाना और नंदगांव के गोस्वामीजन का पदगायन शुरू हो गया है जो कन्हैया के माखन खाकर रास मंडल पहुंचने तक चला है। रास मंडल पहुंचने पर बरसाना वाले समाज ने राधा और नंदगांव के समाज ने कान्हा का पक्ष लिया। दोनों समाजों के बीच फोरै दही की मटकिया प्यारी, सुन लै बरसाने वारी, बिना दान लिए जान न देहिं, समझ लेइयो बृजनारी आदि समाज गायन के साथ हंसी-ठिठोली, हास-परिहास और तर्क-वितर्क का सिलसिला चलता है।
रास मंडल के बाद चित्रा सखी व सखियां बने स्वरूप घर से दही से भरी मटकी लेकर निकलीं। बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर सखियां नाचते-गाते मटकी लेकर चलीं। रास्ते भर श्रद्धालु झूमते रहे। फूल बरसाकर स्वागत किया। सांखरी खोर पर दो पहाड़ियां मिलती हैं। इनमें एक को कृष्ण स्वरूप और दूसरी को राधा स्वरूप माना जाता है। शुक्रवार को दोनों पहाड़ियों पर भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। राधा पर्वत पर महिलाएं और कृष्ण पर्वत पर पुरुष मंडलियां पदगान कर रही थीं। लगभग दो बजे जब मटकी संकरी गली में पहुंची तो कान्हा ने सखियों से दान मांगा। सखियां हंसी-ठिठोली में टालमटोल करती रहीं। अंततः नंदलाल ने सखाओं संग छीना-झपटी करते हुए मटकी फोड़ दी। श्रद्धालुओं ने हथेली, किसी ने आंचल फैलाया और किसी ने कपड़े में भरकर दही लिया।