भक्त को गर्मी का अहसास हुआ तो उसे आराध्य की चिंता सताने लगी। अपने ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए उन्होंने फूलबंगला सजाया। इसी भाव से कामदा (फूलडोल) एकादशी पर ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगला सजाने का क्रम प्रारंभ हो जाएगा। बांकेबिहारी प्रतिदिन शाम को सुगंधित फूलों से बने बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। करीब ढाई माह तक हर शाम मंदिरों में फूलबंगले सजाए जाएंगे।
7 अप्रैल को कामदा एकादशी से प्रारंभ होने वाले फूल बंगला सजाने का क्रम श्रावण मास की हरियाली अमावस्या तक जारी रहेगा। ठाकुर राधावल्लभ लाल, राधारमण मंदिर, राधादामोदर, राधासनेह बिहारी, राधाश्याम सुंदर सहित वृंदावन के अनेक मंदिरों में फूलबंगले सजाए जाएंगे।
बांके बिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि भाव सेवा के अनुरूप भक्त अपने आराध्य को शीतलता प्रदान करने के लिए फूलबंगले सजवाते हैं। उन्होंने बताया कि फूलबंगलों की कीमत हजारों से लेकर लाखों तक हो जाती है। श्रद्धा और हैसियत के हिसाब से श्रद्धालु बंगले बनवाते है।
इन फूलों का होता है प्रयोग
ठाकुरजी के लिए फूलबंगला बनाने में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब, कमल, मोगरा, चमेली, रजनीगंधा, रायबेल, कुंद, मौलश्री आदि फूलों का प्रयोग होता है
दर्जनों गांवों की आमदनी का जरिया हैं फूलबंगला
वृंदावन और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के लिए फूलबंगला निर्माण रोजगार का मुख्य साधन है। आमदनी और रोजी रोटी का जरिया है। फूलबंगला निर्माण में प्रतिदिन सैकड़ों किलो फूलों का प्रयोग होता है। मुख्यरूप से इससे सैनी समाज जुड़ा हुआ है।
इससे न केवल सैनी समाज का व्यापार बढ़ता है। बल्कि इस विधा में लगे कारीगरों को भी इसका लाभ मिलता है। लक्ष्मीनारायण सैनी ने बताया कि वह कई वर्ष से फूलबंगला निर्माण कार्य में लगे हैं। वृंदावन ही नहीं भारत के अन्य इलाकों में भी बंगले सजाने के लिए भी वो जाते हैं।