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सत्याग्रह के नाम पर बंधक बनाए लोग

Sat, 28 May 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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जवाहर बाग से भागकर आए जीजा-साले ने पुलिस को बताए अंदर के हालात - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर बाग में सत्याग्रह के नाम पर लोगों को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। शनिवार को पुलिस की शरण में पहुंचे जीजा-साले यह जानकारी दी। दोनों ने बताया कि बाबा जयगुरुदेव के मंदिर में दर्शन करने आए थे। यहां से उन्हें बहकाकर कुछ लोग जवाहर बाग ले गए। वहां करीब एक माह तक बंधक बनाए रखने के दौरान मानसिक रूप से परेशान किया। पुलिस ने दोनों को उनके गृहनगर रवाना कर दिया है। 
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तड़के गांव सांखी थाना महाना जिला सिद्धार्थनगर निवासी बेचन सिंह (70) अपने साले नेपाल के रूपनदेही जिला निवासी नंदलाल सिंह के साथ अचानक जवाहर बाग से निकलकर पुलिस और पीएसी जवानों के पास जा पहुंचे। जवान दोनों को सदर बाजार थाने ले गए। यहां सीओ सिटी और एसपी सिटी को बेचन और नंदलाल ने आपबीती बताई। इसके बाद सिविल लाइन चौकी आकर बेचन सिंह और नंदलाल ने बताया कि वे ब्रह्मलीन बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी हैं।

एक माह पहले हाईवे स्थित आश्रम में दर्शन के लिए आए थे। उन्हें यहां से एक व्यक्ति बाबा जयगुरुदेव मंदिर की अन्य शाखा दिखाने की कहकर जवाहर बाग ले आया। दोनों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें बंधक बना लिया गया और मानसिक रूप से परेशान किया। खाने में केवल सुबह पतली खिचड़ी और शाम को रोटी और पतली दाल दी जा रही है। बिजली कटने के बाद स्नान भी नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पुलिस को यह बात लिखित में भी दी।
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एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि दोनों की शिकायत पर थाना सदर बाजार में रामवृक्ष यादव और चंदनबोस के खिलाफ लोगाें को बंधक बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। पुलिस ने बेचन और नंदलाल को खाना खिलाने के बाद उनके घर के लिए रवाना कर दिया है। यात्रा के लिए धनराशि भी दी है।

जबरन रोके जा रहे परेशान लोग 
जवाहर बाग के कथित सत्याग्रहियों के कब्जे से मुक्त होकर आए सिद्धार्थ नगर के बेचन सिंह और उनके साले नेपाल निवासी नंदलाल ने बताया कि जवाहर बाग में रहने वालों की संख्या लगभग 2000 है। इनमें 250 से अधिक युवा प्रशासक की भूमिका में हैं। बाकी लोगों को बंधक बनाकर रोका गया है। बिजली और पानी न मिलने से लोग परेशान हैं और बाहर आकर अपने घर जाना चाहते हैं लेकिन 250 से अधिक युवा हरवक्त पहरेदारी कर निकलने नहीं दे रहे। 

पुलिस से लड़ने को उकसाया
बेचन सिंह और नंदलाल ने बताया कि वे जयगुरुदेव आश्रम में दर्शन को आए थे। वहां से जवाहर बाग में लाकर फंसा दिया गया। तीन दिन पहले पुलिस के साथ हुए तनाव के दौरान जबरन हाथों में लाठी थमा दी और बाहर निकलकर खड़े हो जाने को कहा। 
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