आठ साल से स्टेशन पर नहीं बिका पेड़ा
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जंक्शन रेलवे स्टेशन पर आठ साल से मथुरा के पेड़ा और आगरा के पेठा की बिक्री नहीं हो रही है। दोनों ही उत्पाद ब्रज की पहचान होने के कारण यहां से गुजरने वाले यात्रियों में इसकी मांग रहती है। ऐसे में अवैध वेंडर सिंथेटिक पेड़ा और पेठा बेरोकटोक बेच रहे हैं।
मार्च 2008 तक आईआरसीटीसी की ओर से मथुरा में पेड़ा और पेठा की बिक्री के लिए ठेका उठाया जाता था। इससे रेलवे को हर साल करीब 40 लाख रुपये की आमदनी होती थी। इसमें 120 रुपये प्रति किलो के हिसाब से रोजाना मथुरा जंक्शन पर और ट्रेन में पंजीकृत वेंडर छह क्विंटल पेड़ा और तीन क्विंटल आगरा का पेठा बेच देते थे।
रेलवे के अधिकारियों ने 2008 के बाद पेड़ा और पेठा की बिक्री के ठेके न तो रिन्यू किए और न नए ठेका दिए गए। अब पेड़ा के रेट खुले बाजार में 300 रुपये प्रति किलो हैं। रेलवे ने ठेकेदारों के रेट नहीं बढ़ाए। दूसरी ओर आईआरसीटीसी का भी नियंत्रण नहीं रहा। ऐसे में करीब आठ साल से अवैध रूप से वेंडर धड़ल्ले से सिंथेटिक पेड़ा और पेठा बेच रहे हैं।
प्रसाद के रूप में ले जाते हैं मथुरा का पेड़ा
ब्रज के राजा बांकेबिहारी को दही पेड़ा का भोग लगाने की परंपरा है। गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल के लोग पेड़ा को भगवान का प्रसाद मानते हैं। ऐसे में स्टेशन पर मथुरा के पेड़ा की खासी बिक्री होती थी लेकिन रेलवे की लचर व्यवस्था से अब यात्रियों को मथुरा के पेड़ा प्रसाद से दूर कर दिया।