Premanand Maharaj Pravachan: प्रेमानंद महाराज से जब पूछा गया कि पत्नी का पति के लिए धर्म क्या है? तो उन्होंने कहा कि 'पति के सुख में चिंतन करना ही पत्नी का धर्म है। पति को खुश रखना ही एक पत्नी का कर्म और धर्म होता है।'
संत प्रेमानंद महाराज ने एकांतिक वार्तालाप में एक महिला द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि विवाहित महिलाओं के लिए उनके पति ही परमेश्वर के समान होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पति मना करें तो स्त्री को गुरु के पास भी नहीं आना चाहिए।
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दरअसल प्रवचन के दौरान एक महिला ने सवाल किया कि यदि पति और गुरु की बातों में मतभेद हो तो उसे किसका पालन करना चाहिए? इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि गृहस्थ जीवन में पत्नी के लिए पति की आज्ञा सर्वोपरि होती है। उसे अपने पति को परमेश्वर मानकर उनकी इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए। यदि पति गुरु के पास जाने से रोकता है तो न जाएं, बल्कि मन में ही गुरु के बताए मार्ग को स्मरण करें और उनका पालन करें।