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आचमन योग्य बनाया जाएगा गिरिराज परिक्रमा मार्ग के कुंडों का जल

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मथुरा। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग स्थित हरजी कुंड। - फोटो : MATHURA
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गोवर्धन (मथुरा)। गिरिराज परिक्रमा से जुड़े प्राचीन धार्मिक महत्व के कुंड और सरोवरों का जल आचमन योग्य बनाया जाएगा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) नागपुर की टीम ने काम शुरू कर दिया है। फिलहाल उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में परिक्रमा के नौ कुंड़ों की कार्य योजना तैयार की जा रही है।
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गोवर्धन की सात कोसीय परिक्रमा के अंतर्गत हो रहे सभी कार्यों पर पिछले चार साल से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के स्तर से निगरानी कराई जा रही है। इसी के तहत ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रस्ताव पर परिक्रमा मार्ग स्थित धार्मिक महत्व के नौ कुंड़ों के जल को शुद्ध करने और सौंदर्यीकरण की कार्य योजना तैयार करने काम नागपुर के नीरी संस्थान ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में शुरू कर दिया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने खारे पानी की समस्या से प्रभावित गोवर्धन परिक्रमा मार्ग क्षेत्र के कुंड और सरोवर को नहर के पानी से भरने की योजना बनाई है। इस कार्य योजना के अमल में आने से क्षेत्र में भूगर्भ जल के भी बदलने की संभावना के साथ यहां पौधों को पानी से सींचा जा सकेगा। क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार ने 47 लाख के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
ये हैं प्रमुख कुंड
मानसी गंगा, कुसुम सरोवर, रुद्रकुंड, कृष्ण कुंड, राधाकुंड, ललता कुंड, हरजी कुंड, सुरभि कुंड, संकर्षण कुंड
अभी आचमन योग्य नहीं है कुंडों का जल
गोवर्धन। परिक्रमा मार्ग के अधिकांश कुंडों का जल आचमन योग्य नहीं है। इनका नियमित आचमन भी मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। पिछले दिनों राधाकुंड और श्याम कुंड के जल से आचमन के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीमार हुए थे। मानसी गंगा और कुसुम सरोवर के जल की स्थिति भी चिंताजनक है। हरजी कुंड की स्थिति तो बेहद खराब है।
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