अधिक मास की पूर्णिमा को गोवर्धन नगरी का नजारा अद्भुत हो गया। देशभर से श्रद्धालु गिरिराज महाराज के आंगन में हाथ जोड़ कर खड़े थे। परिक्रमा मार्ग पर लगा जैसे पूरा भारत उमड़ आया हो। आस्था की कतारों में विभिन्न प्रदेशों के रंग दिखे लेकिन अलग-अलग नहीं गुलदस्ते में गुंथे हुए। पूरी गोवर्धन नगरी के साथ-साथ सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग परिक्रमार्थियों से अट गया।
बुधवार की रात बारिश से नगरी की सड़कों और गलियों में कई जगह जलभराव के हालात रहे लेकिन इन बाधाओं ने आस्था की अग्नि को और प्रज्ज्वलित किया। श्रद्धालु दंडवती परिक्रमा भी लगाते रहे। गुरुवार की सुबह लाखों श्रद्धालुओं ने मानसी गंगा के घाटों पर लगे फव्वारों से स्नान कर गिरिराज महाराज की पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी।
गुरुवार को पूर्णिमा के चलते तलहटी में परिक्रमार्थियों की संख्या के दबाव में जाम की स्थिति रही। सुबह 8 बजे गिरिराज मुखारबिंद मुकुट तिराहे पर नदवई, भरतपुर निवासी विशम्भर सिंह भीड़ के दबाव में बेहोश होकर गिर पड़े। साथी उनको उपचार के लिए ले गए। दसविसा बाजार में सुबह दुकानदारों ने दुकानें छोड़ कर परिक्रमार्थियों को आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया।
जगह-जगह वाहनों से जाम लगा रहा। गोवर्धन नगरी को जोड़ने वाले मथुरा-अलवर, छटीकरा, सौंख, भरतपुर, डीग मार्ग, बरसाना मार्ग पर वाहनों की कतार लगी रही। पूर्वाह्न 11 बजे तक जाम नहीं खुल पाया। मथुरा रोड, डीग रोड बैरियरों पर पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर वाहनों को अंदर जाने देने के आरोप भी लगे। इससे हालात और खराब हुए।
रात को गिरिराज दानघाटी मंदिर और गिरिराज मुखारबिंद मुकुट मानसी गंगा मंदिर पर रंगीन झालरें और रोशनी आकर्षण रही। भीड़ के चलते परिक्रमार्थियों को बसों की छतों पर बैठ कर यात्रा करनी पड़ी।