पद्मश्री नृत्यांगना गीता चंद्रन का कहना है कि राधा और कृष्ण प्रेम का पर्याय हैं। जहां प्रेम वहीं राधा-कृष्ण हैं।
गीता चंद्रन रमणरेती मार्ग स्थित वीआरआई में चल रहे दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। वृंदावन शोध संस्थान और व्यंजना साहित्य समिति इलाहाबाद की ओर से आयोजित कार्यक्रम का सोमवार को समापन हो गया।
पद्मश्री नृत्यागंना गीता चंद्रन ने कहा कि राधा-कृष्ण परंपरा हैं। प्रतीक हैं। इनको घर-घर में दैनिक क्रियाओं में परिवार के सदस्यों के रूप में स्वीकार किया गया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की राजभाषा अधिकारी डा. ऊषा ने कहा कि प्रेम अनंत है। जिसे राधा-कृष्ण अलौकिकता प्रदान करते हैं। डा. कामेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि राधा-कृष्ण शक्ति हैं। जो प्रेम के नए आयाम स्थापित करती हैं।
जिसने कृष्ण को योगेश्वर की उपाधि प्रदान कराई, उस शक्ति का नाम राधा है। राधा-कृष्ण एकीकरण सत्ता हैं।
इस अवसर पर डा. मधु शुक्ला, डा. राजेश मिश्र, डा. ब्रजभूषण चतुर्वेदी, कुंजलता मिश्रा, डा. महेश नारायण शर्मा, डा. मनीष कुमार मिश्रा, श्रीकृष्ण गौतम, सतीशचंद्र दीक्षित, एमवी दिनेश आदि उपस्थित रहे।