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नोटबंदी से ठप हो गई धान की खरीद

Fri, 18 Nov 2016 12:01 AM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
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धान
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पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने का असर प्रदेश में धान की खरीद पर भी पड़ा है। मजदूर और किसान  बैंकों में कतार में खड़े हैं तो व्यापारियों के सामने भी भुगतान का संकट गहरा गया है। पूरे प्रदेश में धान की खरीद ठप हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक धान उत्पादन वाले जिलों में खरीद सबसे कम है। अगर हालात यही रहे तो पचास लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश में दस लाख मीट्रिक टन धान की भी खरीद नहीं हो पाएगी।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खरीद सत्र एक अक्तूबर से शुरू हो गया था, जबकि पूर्वांचल के जनपदों में एक नवंबर से शुरू हुआ है। 2,488 सेंटरों पर खरीद की जा रही है। 1,53,000 मीट्रिक टन धान की खरीद अभी तक हो चुकी है। लेकिन नोटबंदी के बाद से सभी सेंटरों पर धान की आवक घट गई है।

आगरा, अलीगढ़, बरेली, लखीमपुर खीरी, बदायूं, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, बागपत, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में पिछले एक सप्ताह से धान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहा है। दरअसल किसान नोटबंदी में ऐसे उलझ रहे हैं कि धान लेकर जा ही नहीं रहे। जो बड़े किसान हैं उन्हें मजदूर नहीं मिल पा रहे और धान सेंटरों पर नहीं पहुंच पा रहा है। मौजूदा समय में किसान के हाथ में पैसा नहीं है।
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आगरा मंडल में केवल 15 टन की खरीद
आगरा मंडल के जनपद धान खरीद में बहुत पिछड़ गए हैं। 6,300 टन का टारगेट है और 15 टन खरीदा गया है। हालांकि यहां मोटा धान बहुत कम, पतला धान ज्यादा होता है जिसका मार्केट भाव सरकारी रेट से कहीं ज्यादा है। जिस कारण किसान सरकारी केंद्रों पर कम आते हैं। आगरा में तो खरीद हो ही नहीं पाई है। जबकि मथुरा में दो टन, एटा में  916 क्विंटल और मैनपुरी में 13 टन की खरीद हो पाई है।

फीरोजाबाद में अभी तक खरीद हो ही नहीं पाई है। सभी एजेंसियों के सेंटर खाली पड़े हैं। आगरा मंडल के संभागीय विपणन अधिकारी एके पाल का कहना है कि धान की खरीद इस बार सुस्त है। वैसे भी आगरा में मंडल में बारीक धान ज्यादा होता है जिसका मार्केट भाव सरकारी रेट से ज्यादा रहता है लिहाजा किसान मार्केट में धान बेच देता है।  

प्राइवेट एजेंसियों ने भी हाथ खींचे
मंडी में धान खरीद ठंडी पड़ी है। नोटबंदी के चलते इस बार प्राइवेट एजेंसियां भी धान खरीद से बच रही हैं। एजेंसियों को भी लेबर नहीं मिल पा रही है। उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार के कई बड़े राइस मिलर्स यूपी में आकर धान की खरीद करते थे। चावल की बिक्री करने वाली कंपनियां भी मार्केट में आती थीं लेकिन इस बार नोटबंदी के चलते सब खामोश हैं।
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धान खरीद का लक्ष्य- 50 लाख मीट्रिक टन
अभी तक हुई खरीद- 1,53000 मीट्रिक टन
सूबे में कुल खरीद केंद्र- 2488
पश्चिम में खरीद सत्र शुरू हुआ- 1 अक्तूबर से
पूर्वांचल में खरीद सत्र शुरू हुआ- 1 नवंबर से
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