मथुरा। बेमौसम बारिश और ओलों ने किसान की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पक कर तैयार खड़ी गेहूं, सरसों और आलू की फसलों को कुदरत की मार से भारी क्षति पहुंची है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार शाम तक जिले के 18,000 से अधिक किसान अपनी शिकायतें टोल-फ्री नंबर 14447 पर दर्ज करा चुके हैं।
प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, जिले के कई गांवों में फसल बर्बादी का ग्राफ 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया है। विशेष रूप से ओलाें के कारण गेहूं की बालियां टूट कर गिर गई हैं, जिससे 45 से 55 प्रतिशत तक के नुकसान का अनुमान है। सरसों के किसान भी मार झेल रहे हैं। कटी हुई फसल भीगने से दानों में नमी बढ़ गई है, जिससे गुणवत्ता गिरने और फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
जिले में इस बार रबी सीजन के तहत बुवाई का रकबा गेहूं 1.65 लाख हेक्टेयर, सरसों 51 हजार हेक्टेयर और आलू 16500 हेक्टेयर में किया गया था। गेहूं और सरसों पर मौसम की मार सबसे ज्यादा पड़ी है। कृषि विभाग, राजस्व और फसल बीमा की संयुक्त टीमें अब गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। नियमानुसार, फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने तहसील स्तर पर विशेष शिविर लगाए हैं ताकि किसान पंजीकरण से वंचित न रहे।
विभाग के अनुसार, प्राप्त 18 हजार शिकायतों में से अब तक 5 हजार किसानों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। शेष मामलों में टीमें काम कर रही हैं। राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने मांग की है कि सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। जल्द उचित मुआवजा किसानों के खातों में भेजा जाए ताकि उन्हें इस आर्थिक संकट से उबारा जा सके।