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कोर्ट के निर्णय ने आगे बढ़ाई शादी की तारीख

Sat, 12 Sep 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
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परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने के हाईकोर्ट के निर्णय की शिक्षामित्रों पर दोहरी मार पड़ी है। इस फैसले से एक ओर तो समायोजन का इंतजार कर रहे शिक्षामित्र निराश हैं वहीं दूसरी ओर समायोजित हो चुके विवाहयोग्य शिक्षामित्रों के तय विवाह संबंध पर संकट की बात कही जा रही है। फैसला आने के चंद घंटों बाद ही कई शादियों की तारीख भी आगे बढ़ाए जाने की बात बताई गई।
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राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण दिलाने के बाद बीते वर्ष 2014 के अगस्त माह में समायोजन प्रक्रिया शुरू की थी। इसके प्रथम चरण में मथुरा में 780 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन किया गया। करीब चार माह बाद इन्हें वेतन भी मिलने लगा। इसके बाद वर्ष 2015 के मार्च माह में द्वितीय चरण के 1042 में से करीब 865 शिक्षामित्रों का समायोजन कर दिया गया।

दूसरे चरण के 177 और तीसरे चरण के 200 शिक्षामित्र अभी समायोजन से वंचित रह गए थे। शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने संबंधी याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद समायोजन रद्द करने का निर्णय सुना दिया। इस फैसले से जिले के समायोजित हो चुके 1645 शिक्षामित्रों का समायोजन तो रद्द हुआ ही, अब इन्हें हटाए जाने की भी तलवार लटक रही है।
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हाईकोर्ट के इस फैसले से जिले के समायोजित हो चुके और शेष रह गए शिक्षामित्र हतप्रभ और हताश हैं। अब इस निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बनाया जा रहा है। इधर फैसला आने के बाद विवाह योग्य शिक्षामित्रों के विवाह संबंध भी खतरे में पड़ने की चर्चा रही। चौमुंहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय ढाहरौली में तैनात शिक्षामित्र श्रीकांत शर्मा भी समायोजन से वंचित रह गए थे।

उन्होंने बताया कि उनका विवाह समायोजन के लटके होने के कारण ही रुका हुआ था। अब विवाह इस निर्णय के चलते स्थगित हो गया है। वहीं गोवर्धन तहसील के शिक्षामित्र राजकुमार चौधरी कहते हैं कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद परिवारीजन भी सकते में हैं। इतने वर्ष सेवा के बाद अब भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।


हाईकोर्ट के निर्णय से सभी शिक्षामित्रों को बहुत दुख है। उन्होंने वर्षों तक विभाग की सेवा की लेकिन इसके बदले उन्हें कुछ नहीं मिला। इस प्रकरण में संघ के प्रदेश पदाधिकारियों की उदासीनता भी एक कारण बनी है। शिक्षामित्र इन पदाधिकारियों का भी विरोध करेंगे। अभी निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने के रास्ते खुले हैं।
संजय सिसौदिया
जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ  

उच्च न्यायालय के निर्णय से जिले के करीब दो हजार से अधिक शिक्षामित्र निराश हैं। अभी उन्हें हताश होने की आवश्यकता नहीं है। इस निर्णय के विरुद्ध शिक्षामित्र सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
दुष्यंत सारस्वत
जिलाध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन

समायोजन के लिए संघर्ष जारी रहेगा। हाईकोर्ट के निर्णय से वह निराश तो हैं, लेकिन अभी हिम्मत नहीं हारी है। शिक्षामित्र अपने हक की लड़ाई के लिए उच्चतम न्यायालय तक जाएंगे।
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प्रिया शर्मा
द्वितीय चरण में समायोजन से वंचित शिक्षामित्र
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