वृंदावन। लखनऊ में कोचिंग सेंटर आग लगने की घटना के बाद मुख्यमंत्री से मिले निर्देश के बाद मथुरा से लेकर वृंदावन तक एमवीडीए, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम क्षेत्र में संचालित हो रहे गेस्ट हाउस, होम स्टे पर छापेमारी की तो संचालकों में खलबली मच गई। चेकिंग के दौरान कई इकाइयों में नियमों के उल्लंघन पर अधिकारियों ने उन्हें सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान कई संचालकों ने हवाला दिया कि वह होम स्टे चला रहे हैं, इसलिए इतने नियम उनके लिए जरूरी नहीं है। इस पर अधिकारियों ने जब उन्हें नियम समझाए तो वह बगले झांकने लगे।
जांच अधिकारियों ने मौके पर ही स्थिति स्पष्ट करते हुए संचालकों को सख्त लहजे में हिदायत दी। अधिकारियों ने साफ कहा कि होम स्टे योजना का मतलब यह कतई नहीं है कि आप पूरे मकान को व्यावसायिक रूप से होटल की तरह किराये पर उठा दें। सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक, होम स्टे के रूप में पंजीकृत भवन में मकान मालिक (संचालक) का खुद अपने परिवार के साथ उसी परिसर में रहना अनिवार्य है।
इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को घर जैसा सुरक्षित माहौल और स्थानीय संस्कृति-खानपान का अनुभव कराना है न कि इसे पूरी तरह कॉमर्शियल लॉज में तब्दील करना। चेकिंग के दौरान कई ऐसे होम स्टे भी मिले जो बिना वैध पंजीकरण और बिना स्वीकृत मानचित्र (बिल्डिंग मैप) के धड़ल्ले से चल रहे थे। प्रशासन ने ऐसे सभी डिफॉल्टर्स को चिन्हित कर लिया है। अब उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।