वृंदावन। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने कालीदह घाट पर ही तो कालिया नाग को नथते हुए यमुना को उसके प्रभाव से मुक्ति किया था। इस धार्मिक और एतिहासिक प्रमाण को जीवित रखने के लिए इंदौर रियासत ने वृंदावन में यमुना पर कालीदह घाट का निर्माण कराया। इसकी खूबसूरत वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन ये प्राचीन घाट अब वृंदावन के अन्य घाटों की भांति विकास की आधुनिकता में खो गया है। घाट के आगे बनी सड़क ने इसे ढक दिया है।
ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के वैसे तो अनेक स्थान हैं, लेकिन वृंदावन को राधाकृष्ण की लीलाओं के लिए सबसे खास स्थल बताया जाता है। इसके साक्ष्य यहां की लता-पताएं ही नहीं यमुना भी हैं। कहते हैं कि इसी स्थली पर भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का मर्दन किया था। इस स्थल को वृंदावन में यमुना के किनारे कालिया दह घाट के रूप में पहचाना जाता है। लेकिन यह घाट अब अपनी पहचान को खो रहा है। यह एतिहासिक घाट के आगे ऊंची सड़क होने के कारण पूरी तरह से नजर नहीं आता है।
होलकर स्टेट ने संवारा था कालीदह घाट
कालीदह घाट पर लगीं शिला बताती हैं कि इसका जीर्णोद्धार होलकर स्टेट इंदौर द्वारा कराया गया था। वृंदावन शोध संस्थान के शोध अध्येता राजेश शर्मा ने बताया कि घाट की पक्की खूबसूरत तीन छतरियों पर यह शिलालेख मौजूद हैं। इसमें संवत 1973 और सन 1916 का उल्लेख किया गया है। घाट की वास्तुकला इसकी खूबसूरती को और भी निखारती है। बनावट और उसकी खूबसूरती आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
विकास की अंधी दौड़ में घाटों को सड़क के नीचे दबा दिया गया है। कालीदह घाट जो भगवान की लीला स्थली का साक्षात प्रमाण है, वह भी इसका शिकार हो गया। हालांकि करीब 18 साल पहले एक विदेशी भक्त और प्रशासन ने इस घाट की खुदाई की, इसे छतरियों की मरम्मत कराई। इसकी खूबसूरती को निखारा गया। इसकी अभी भी कई सीढ़ियां घाट आगे सड़क में दबी हुई हैं।
रमाकांत पुरोहित, सेवायत प्रबंधक
कालीदह घाट मंदिर, वृंदावन