मथुरा। वृंदावन में मोटरबोट हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासनिक मशीनरी की नींद टूट गई। सोमवार को पहली बार नाविक कल्याण समिति की बैठक में यमुना में नाव, मोटरबोट और स्टीमर संचालन के लिए गाइड लाइन तय की गई। हर जलयान का वार्षिक पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। गाड़ियों की तरह नाव व मोटरबोट के निर्धारित रूटों पर ही चल सकेंगे। इसके लिए पुलिस का निगरानी तंत्र भी बनाया जाएगा। मॉडिफाइड नावें अब नहीं चल सकेंगी।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में तय किया गया कि यमुना में संचालित होने वाली नाव, बोट, स्टीमर आदि जलयानों का नियंत्रण संबंधित तहसील प्रशासन और नगर निगम मिलकर करेंगे। इसके तहत डबल स्टोरी वाली नाव या मोटरबोट का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इन्हें सीज किया जाएगा। मॉडिफाइड करके नावों का संचालन करने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। अब बिना पंजीकरण कराए कोई नाव या बोट नहीं चला सकेगा। इसके लिए संबंधित विभाग 16 अप्रैल से पंजीकरण करना शुरू कर देंगे। जलयानों का श्रेणी के मुताबिक वार्षिक शुल्क भी निर्धारित किया गया है।
अधिकारियों ने तय किया कि घाटों पर जल यानों का संचालन करने वालों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं हो, इसके लिए सभी को रूटों का आवंटन किया जाएगा। सभी अपने निर्धारित रूटों पर नावों का संचालन करेंगे। रूट का अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वृंदावन हादसे के बाद घाटों पर भी पुलिस का निगरानी तंत्र सख्त किया जाएगा। जल पुलिस की तैनाती पर भी विचार किया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी प्रकार के नाविक अपने साथ लाइफ सेविंग जैकेट्स रखेंगे, जोकि वह नाव में सवार होने वाले सैलानियों को देंगे। इसके लिए नाविकों को 421 लाइफ सेविंग जैकेट्स प्रदान की गई हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि नाविकों की एक कल्याण समिति का गठन होगा, जोकि उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। नगर आयुक्त जग प्रवेश ने बताया कि नाविक कल्याण समिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए हैं। अब नावों के संचालन के लिए नई गाइड लाइन तैयार की गई है। बिना पंजीकरण नौका संचालन नहीं हो सकेगा।