मंडी स्थित क्रय केंद्र के बाहर पड़ा गेहूं।
मथुरा। खरीद केंद्र पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया अभी सुचारु नहीं हुई है, जिससे अन्नदाता भीषण गर्मी में सड़कों पर रातें बिताने को मजबूर हैं। 30 मार्च से सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद ट्रैक्टर-ट्रालियों में गेहूं लादकर आए किसान दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन केंद्र प्रभारी बारदाने (बोरों) की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई किसान भाड़े की ट्रालियों का भारी खर्च उठा रहे हैं और आठ-आठ दिनों से अपनी उपज खुले आसमान के नीचे डाले बैठे हैं, जिससे फसल की सुरक्षा और आर्थिक नुकसान का डर बना हुआ है। मंडी स्थित गेहूं क्रय केंद्र की डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) नहीं बनी है, जिसकी तकनीकी खामी के चलते पूरी व्यवस्था ठप पड़ी है। रजिस्ट्रेशन और किसान आईडी होने के बावजूद सुनवाई न होने से आक्रोशित किसानों का कहना है कि यदि सरकार संसाधन नहीं जुटा सकती तो ऐसे केंद्रों को बंद कर देना ही बेहतर है। वर्तमान में प्रबंधन की इस विफलता के कारण किसान निजी आढ़तों पर गेहूं उतारने को विवश हैं। वहीं मंडी स्थित खाद्य विभाग के गेहूं क्रय केंद्र पर भी किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त बारदाना नहीं है।
जिले में 1999 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। बारदाने की जिले में कमी नहीं है। फार्मर आईडी में जितनी जमीन है, उसी हिसाब से खरीद की जा रही है। - संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी