गांव नगला अक्खा में आंगनबाड़ी केंद्र पर खराब पोषाहार की जांच करते सीडीपीओ योगेंद्र सिंह
सौंख। गर्भवती महिलाओं को खराब पोषाहार वितरण का मामला सामने आने के बाद महिला एवं बाल कल्याण विकास विभाग के डीपीओ ने जांच के आदेश दिए। इस पर सीडीपीओ ने आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर जांच की तो पोषाहार पिछले साल अक्तूबर का पाया गया। वितरण में लापरवाही बरतने पर आंगनबाड़ी का एक माह का वेतन काटा गया है। साथ ही सीडीपीओ गोवर्धन की ओर से खराब पोषाहार की रिपोर्ट डीपीओ को सौंपी गई।
गोवर्धन ब्लाॅक की ग्राम पंचायत नैनूपट्टी के गांव नगला अक्खा में सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरण किया जा रहा था। तभी महिलाओं ने खराब पोषाहार को लेने से इनकार कर दिया। महिलाओं को आरोप था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को खराब दाल और दलिया वितरित किया गया था। पिछले 3 माह का पोषाहार वितरित नहीं किया। उधर, खराब पोषाहार की खबर अमर उजाला में मंगलवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसे लेकर विभागीय अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए। गोवर्धन ब्लाॅक के सीडीपीओ योगेंद्र सिंह जांच करने के लिए पहुंचे। जांच में पोषाहार सामग्री (दाल और दलिया) के पैकेट पिछले साल मार्च और अप्रैल के पाए गए। आंगनबाड़ी से खराब पोषाहार वितरित करने की वजह पूछी गई तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मामले में सीडीपीओ योगेंद्र सिंह ने आंगनबाड़ी की लापरवाही पर उनका एक माह का वेतन काटा और दो कार्य दिवस में अपना जवाब देने के लिए निर्देशित किया है। साथ ही आंगनबाड़ी को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस प्रकार का खराब पोषाहार वितरित नहीं किया जाएगा। खराब पोषाहार की जांच रिपोर्ट तैयार कर डीपीओ कार्यालय में सौपी गई। सीडीपीओ योगेंद्र सिंह ने बताया कि खराब दाल और दलिया को वापस कराया गया है।