मथुरा। बारिश के मौसम में पथरी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में पित्त की थैली और पेशाब की नली में पथरी के मामले सर्वाधिक सामने आ रहे हैं। डॉक्टर बढ़ते मामले के पीछे बारिश में प्यास कम लगने पर पानी कम मात्रा में पीना बता रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को पर्याप्त पानी पीने और तेज कदमों के साथ चलने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के डाॅ. सिद्धार्थ धनगर ने बताया कि बारिश में पथरी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। क्योंकि बारिश में गर्मी की तुलना में लोग दिनभर में पानी कम पी रहे हैं। जबकि सामान्य रूप से एक व्यक्ति को पूरे दिन में तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा आधुनिक जीवन शैली अपनाने और पारंपरिक संतुलित भोजन के बजाय फास्ट फूड खा रहे हैं। इसलिए पथरी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल में 20 से 30 पथरी के मरीज सामने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर किडनी स्टोन, केल्यिशम स्टोन, बिलियरी स्टोन की परेशानी रोगियों में देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी पथरी का बड़ा कारण हो सकता है। इसके अलावा कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा मात्रा में बढ़ने पर भी पित्त की थैली में पथरी होने की संभावना ज्यादा होती है। इस कारण लीवर से ज्यादा कॉलेस्ट्रोल बनने से क्रिस्टल बन जाते हैं, वही पथरी का रूप का ले लेते हैं।
इसके अलावा पित्त की थैली के बीच में कॉमन हिपेटिक डक्ट पथरी बन रही है। इसके अलावा आजकल पित्त की थैली में पथरी का कारण मोटापा, कैलोरी कम मात्रा में लेना, एकसाथ वजन को घटाना, ज्यादा लंबे समय तक भोजन न करना भी है। महिलाओं में गर्भावस्था के समय एस्ट्रोजन हार्मोन्स बढ़ने से भी पथरी होने की संभावन बढ़ जाती है।
पथरी से बचाव के उपाय
दिनभर में तीन से चार लीटर पानी पीएं। तेज कदमों के साथ चलें। ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें। हरी सब्जियां एवं फल खाएं।