ब्रज की नृसिंह लीला परंपरा पर आयोजित एकाग्र प्रदर्शनी में शनिवार को प्राचीन नृसिंह लीला का मंचन किया गया। भगवान गणेश, वराह, नृसिंह आदि पात्रों के नृत्य भंगिमाओं से प्रभावित किया। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में बाल वराह लीला की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही।
नृसिंह मंदिर के सेवायत आचार्य दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि नृसिंह लीला परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए संस्थान का प्रयास सराहनीय है। सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि युवाओं को अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक करना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है।
कार्यक्रम के संयोजक डा. राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी में इस परंपरा से जुड़े संदर्भों को रेखांकित किया गया है। कृष्ण मुरारी मोतीवाला, मुकेश अग्रवाल, आशीष गोस्वामी, रामगोपाल शर्मा, मानू शर्मा, पं. विजय किशोर मिश्र, गोपाल शर्मा, बबलू शर्मा, शंकर पहलवान, मनीष गौतम, भौंपी षर्मा, गणेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
मुल्तान से आई मूर्ति का अभिषेक
पत्थरपुरा स्थित बड़ी सूरमा कुंज में शुक्रवार को भगवान नृसिंह जयंती महोत्सव मनाया गया। इसमें पाकिस्तान के मुल्तान स्थित नृसिंह मंदिर से प्राप्त भगवान नृसिंह देव की मूर्ति का अभिषेक किया गया। ये मूर्ति पांच सौ वर्ष पुरानी बताई जाती है। फूल बंगला भी सजाया गया।
शाम को विद्वत संगोष्ठी में महंत प्रेमदास शास्त्री ने कहा कि भगवान नृसिंह का अवतरण भक्त प्रह्लाद की भक्ति से ही संभव हो पाया। महंत हरिदास महाराज, महंत प्राणकृष्ण दास, शंभूचरण पाठक, भक्तमाल दास, जगदीश नीलम, रमेशचंद्र विधिशास्त्री, गोविंद गौतम, राधारमण दास आदि उपस्थित रहे।