मथुरा। निजी स्कूलों की फीस निर्धारण में अब मनमानी नहीं चलेगी। डीएम की अध्यक्षता में जिले में पहली बार शुल्क नियामक समिति का गठन हुआ है। यह समिति स्कूलों की वित्तीय गतिविधियों सहित शैक्षणिक कैलेंडर आदि पर निगाह रखेगी। स्कूली शिक्षा में कोई भी निजी स्कूल अपने हिसाब से बदलाव नहीं कर सकेगा।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शासन के निर्देश पर गठित शुल्क नियामक समिति में डीएम पुलकित खरे के साथ डीआईओएस, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन, एक प्रधानाचार्य, चार्टर्ड अकाउंटेंट को शामिल किया गया है। मंगलवार को समिति की पहली बैठक हुई।
इसमें बताया गया कि 20 हजार रुपये या इससे अधिक वार्षिक फीस लेने वाले विद्यालय इस समिति के अधीन होंगे। विद्यालय अपने स्तर से हर साल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। फीस बढ़ाने से पूर्व समिति से अनुमोदन लेना होगा। 5 वर्ष से पूर्व विद्यालय अपनी ड्रेस नहीं बदल सकेंगे। हर वर्ष सत्र आरंभ होने से दो माह पूर्व ही विद्यालय की समस्त गतिविधियों की जानकारी व पूरे सत्र का शैक्षणिक कैलेंडर समिति के समक्ष रखना होगा।
इतना ही नहीं विद्यालय की वेबसाइट पर शिक्षकों के नाम, उनकी योग्यता, विद्यालय में चलने वाली कक्षाएं, कोर्स और उनकी फीस की जानकारी भी साझा करनी होगी। यदि विद्यालय ऐसा नहीं करते हैं तो पहली बार में एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। बार-बार गलतियां मिलने पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्यवाही की जाएगी। डीएम पुलकित खरे ने बताया कि अभिभावकों को राहत देने और निजी विद्यालयों द्वारा शिक्षा को व्यवसाय बनाए जाने पर नकेल कसने की दिशा में यह काम किया गया है। विद्यालय संचालक अब अपनी मनमानी के अनुसार अभिभावकों पर कोई भी आर्थिक बोझ नहीं डाल सकेंगे।