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अब दौड़ाए जाएंगे तोंद वाले दरोगा

Thu, 08 Sep 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला मथुरा
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में पुलिस की फिटनेस पूरी तरह से बिगड़ गई है। चालीस साल की उम्र पार कर चुके अधिकांश दरोगाओं की तोंद निकल आई है। थोड़ा सा दौड़ना पड़ जाए तो सांस फूल जाती है। शुगर, ब्लडप्रेशर और यूरिक एसिड बढ़ रहा है। बीते दिनों विभागीय प्रमोशन पाकर दरोगा बने पुलिस कर्मियों का जब ट्रेनिंग सेंटरों में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तब इनमें बीस फीसदी पुलिस वाले किसी न किसी रोग से पीड़ित निकले।
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पुलिस कर्मियों की बिगड़ी फिटनेस का असर उनकी सर्विस पर भी पड़ रहा है। वह स्वस्थ मन से काम नहीं कर पा रहे हैं। बदमाशों की तलाश में दी जानी दबिश में भी पूरा जोर नहीं दिखा पाते हैं। अगर बदमाशों के पीछे भागना पड़ जाए तो संभव नहीं हो पाता। माना गया है कि नियमित व्यायाम न होने से पुलिस वालों का वजन बढ़ रहा है और वे रोगी हो रहे हैं। ब्लड प्रेशर और शुगर तो आम हो गई है। 

मार्च में विभागीय प्रमोशन पाकर 1100 हेड कांस्टेबल दरोगा बने थे। इन सभी का प्रशिक्षण प्रदेश के नौ प्रशिक्षण संस्थानों पर कराया गया। इनमें अधिकांश वह थे जो पचास साल के करीब हो गए थे। जब इन सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तो करीब 400 दरोगा बीमार निकले। किसी को दिल की बीमारी ने घेर रखा था तो किसी की शुगर अनियंत्रित थी। 
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अब पुलिस वालों को चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए कैप्सूल कोर्स तैयार किए जा रहे हैं। डीजी ट्रेनिंग सुलखान सिंह ने बताया कि अभी तो प्रशिक्षण चल रहे हैं। जब ट्रेनिंग सेंटर खाली हो जाएंगे तब फिटनेस के लिए कोर्स चलाया जाएगा। नियमित व्यायाम होगा। फील्ड में दौड़ाया जाएगा। योगाभ्यास कराएंगे।

शुक्रवार की परेड में नहीं जाते पुलिस अफसर
पुलिस की फिटनेस के लिए हर शुक्रवार को पुलिस लाइन में परेड की व्यवस्था है। लेकिन कांस्टेबल, दरोगा और इंस्पेक्टर तो छोड़िए खुद पुलिस कप्तान परेड में नहीं जा रहे हैं। पुलिस लाइन के आरआई चंद पुलिस वालों को इकट्ठा करके परेड की औपचारिकता पूरी कर देते हैं। जबकि यहां हर पुलिस वाले का पहुंचना अनिवार्य है। हर थाने पर भी नियमित एक्सरसाइज के आदेश हैं। लेकिन कहीं हो ही नहीं पा रही है।  

इन सर्विस ट्रेनिंग बंद हो गई
आर्म्ड पुलिस के लिए नियम है कि एक महीने का प्रशिक्षण कराया जाए। यह प्रशिक्षण फिटनेस के लिए शुरू किया गया था। फायरिंग बट पर ले जाकर चांदमारी कराई जाती थी। मगर अब ड्यूटी के बोझ का बहाना करके इन सर्विस ट्रेनिंग बंद कर दी गई। तमाम पुलिस वाले तो ऐसे हैं जिन्होंने पिछले कई साल से राइफल चलाकर नहीं देखी होगी। रिटायर डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि पुलिस वालों की जो नियमित ट्रेनिंग थी वह पूरी तरह से बंद हो गई है। यही वजह है कि उनकी फिटनेस खराब हो गई है। कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है।
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