होलीगेट का निरीक्षण करने पहुंचे अफसरों के सामने ही उठे सवाल
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आखिर कब तक निरीक्षण होगा। वर्षों से यही चल रहा है। शहर का हृदयस्थल कहे जाने वाले होलीगेट की बदहाली देखने तो अफसर पहुंच जाते हैं लेकिन सुधार का कोई प्लान नहीं बनता। मंगलवार को भी यही हुआ। अधिकारी आए। एक दो जगह देखा। व्यापारियों से बात की और चले गए। अब तो लोग भी कहने लगे हैं कि निरीक्षण नहीं सुधार चाहिए।
हेरिटेज सिटी का हिस्सा बन चुके इस धार्मिक शहर में सबसे प्रमुख क्षेत्र होलीगेट इस वक्त सबसे ज्यादा बदहाल है। दो दिन की बरसात के दौरान सड़कों से गंदा पानी नहीं हट सका। आधा दर्जन स्थानों पर सड़क जमीन में धंस गई। फुटपाथ का खड़ंजा भी जगह-जगह धंसते हुए लोगों को डरा रहा है। सड़क के बीच डिवाडर बुरे हाल में है। बिजली के बॉक्स जमीन पर पड़े हुए हैं। चौक नालियों का पानी फुटपाथ पर बह रहा है। यहां शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। अनेक बिजली और बीएसएनएल के अनुपयोगी खंभे अव्यवस्था को जाहिर कर रहे हैं।
बरसात के दौरान होलीगेट क्षेत्र की ये तस्वीर डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने देखी, तो कार्यदायी संस्थाओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को होलीगेट का जायजा लेने भेज दिया। मंगलवार को होलीगेट पहुंचे एडीएम वित्त रवीन्द्रकुमार, विप्रा सचिव विजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव, सहायक अभियंता सचिन कुमार और आर्किटेक्ट मयंक गर्ग ये सब देखा। करीब 30 मिनट का जायजा लेने के बाद वहीं टूटी सड़कें और टूटी नालियों को बनाने, अनुपयोगी खंभों को उखाड़ने और पार्किंग के लिए स्थल ढूंढ़ने पर सहमति बन सकी। इस दौरान होलीगेट की मुख्य समस्या पालिका और जलनिगम के अधिकारी मौजूद ही नहीं थे।
शौचालय तक नहीं
होलीगेट क्षेत्र में शौचालय तक नहीं है। इसके लिए महिला व्यवसायी को अनशन तक करना पड़ा है। फिर भी अब तक नतीजा नहीं निकला है। इसके लिए महिला व्यवसायी ने डीएम को भी द्वार खटखटाया था।