उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान मथुरा (यूपी वेटरनेरी यूनिवर्सिटी) अब डेयरी टेक्नोलाजी में बीटेक की डिग्री प्रदान करेगी। विवि के बोर्ड ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर शासन को प्रस्तावित कर दिया है।
वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के सभागार में शुक्रवार को बोर्ड की बैठक हुई। इसमें सदस्यों ने यूनिवर्सिटी की समस्याओं पर चर्चा की और राज्य सरकार को कई प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया। इसमें अतिक्रमण का शिकार हो रही जमीन को बचाने के लिए बाउंड्रीवाल की आवश्यकता, अपूर्ण कुलपति आवास, नवीन कालेजों की शुरूआत न होना आदि बिंदु शामिल रहे।
इसी दौरान बोर्ड के समक्ष प्रदेश की आवश्यकता और राज्य सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप डेयरी टेक्नोलोजी में बीटेक डिग्री का कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इसे बोर्ड ने तुरंत स्वीकृति दे दी। प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में यह अपनी तरह का पहला कोर्स होगा। इसके आलवा बैठक में स्नातक छात्र-छात्राओं के इंटर्नशिप अलाउंस में वृद्धि का प्रस्ताव भी रखा गया। वर्तमान में यह भत्ता सिर्फ एक हजार रुपये है, जिसे आईसीएआर के मुताबिक किए जाने पर सहमति दी गई।
पीजी छात्रों को अन्य राज्यों की वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के पैटर्न पर स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में बोर्ड के समक्ष शिक्षकों के लिए समयमान वेतनमान का भी प्रस्ताव आया। इन सभी प्रस्तावों को विवि के बोर्ड ने स्वीकृति प्रदान करते हुए शासन को भेज दिया है।
बैठक की अध्यक्षता कुलपति डा. केएमएल पाठक ने की। सदस्यों के रूप में सचिव पशुधन के प्रतिनिधि उपसचिव सुनील कुमार, निदेशक पशुधन के प्रतिनिधि डिप्टी डायरेक्टर आगरा, सचिव उच्च शिक्षा के प्रतिनिधि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आगरा, सचिव वित्त के प्रतिनिधि वरिष्ठ कोषाधिकारी मथुरा, चंद्रप्रकाश, केपी सिंह, मंजू सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन कार्यवाहक कुलसचिव डा. पीके शुक्ला ने किया।
अफसरों की विवि के प्रति बेरुखी
एक बार फिर वेटरनेरी विवि की बोर्ड बैठक में शासन स्तर के उच्चाधिकारियों अपने प्रतिनिधियों को ही भाग लेने भेज दिया। अफसरों की इसी बेरुखी के चलते वेटरनेरी यूनिवर्सिटी की यह हालत है। पद, वित्त सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर यूनिवर्सिटी के अधिकारी लखनऊ चक्कर लगाते हैं लेकिन उनकी बात को तवज्जो नहीं दी जाती। विवि के पास अब तक कुलसचिव तक नहीं है।
सेल्फ फाइनेंस कालेज को ना
वेटरनेरी यूनिवर्सिटी ने सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत कालेज संचालित न करने का निर्णय लिया है। शासन की ओर से यूनिवर्सिटी बोर्ड में नामित सदस्यों ने साफ कर दिया कि सेल्फ फाइनेंस संस्थानों में प्रदेश के गरीब बच्चे शिक्षा नहीं ले पाते हैं। ऐसे में सरकार को वेटरनेरी यूनिवर्सिटी के लिए प्रस्तावित नवीन कालेजों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए।