प्रशासन ने जिले की 111 ग्राम पंचायतों को इस वर्ष खुले में शौच की परंपरा से मुक्त करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए निजी शौचालय निर्माण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जाएगा और इसके बाद भी घर से लोटा लेकर निकलने वालों को गांधीगीरी के माध्यम से रोका जाएगा।
स्वच्छता मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त गांव की योजना के लिए लिए जिले में पंचायती राज विभाग ने 111 ग्राम पंचायतों का चयन किया है। सर्वे के माध्यम से चयनित ग्राम पंचायतें जिले की सबसे कम आबादी वाली पंचायतें हैं।
इनमें 150 से लेकर 250 परिवारों के मकान हैं। इसमें भी 50 प्रतिशत परिवारों ने निजी स्तर पर ही शौचालयों का निर्माण करा लिया है। हालांकि खुले में जाने की परंपरा इन गांवों में बरकरार है।
इन गांवों को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाने के लिए महिला कल्याण सेवा निगम को जनजागरूकता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह संस्था अफसर और ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर ग्रामीणों को खुले में शौच से होने वाली बीमारियों से अवगत कराएगी।
संस्था की कोशिश होगी कि इन गांव के अधिकांश लोग निजी स्तर पर अपने घरों में शौचालय का निर्माण करा लें। अत्यंत गरीब परिवाराें को इसके लिए सरकारी मदद दी जाएगी।
डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस प्रक्रिया में आम लोगों को जागरूक करने के लिए संस्था के सदस्य गांधीगीरी का भी सहारा लेंगे। गांव में प्रात:काल ही पहुंचकर संस्था के सदस्य घर से लोटा लेकर निकलने वालों को रोकने के लिए उन्हें फूल देंगे या फिर उनका माला पहना कर स्वागत करेंगे।