नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मथुरा छावनी क्षेत्र में यमुना किनारे कूडे़ के निस्तारण पर प्रदेश सरकार सहित छावनी परिषद, केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दिए हैं। संबंधित पक्षों को अब अपना जवाब 16 दिसंबर तक दाखिल करना होगा।
मथुरा छावनी क्षेत्र के अंतर्गत डीएम आवास के पीछे यमुना किनारे कूडे़ का निस्तारण किया जाता है। यहां यमुना के किनारे को टंचिंग ग्राउंड के रूप में प्रयोग किए जाने के खिलाफ भाजपा छावनी मंडल के उपाध्यक्ष तपेश भारद्वाज ने एनजीटी में याचिका दायर की थी।
इस पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को एनजीटी को अभिवक्ता राहुल कुमार और सार्थक चतुर्वेदी ने याची का पक्ष रखा। अवगत कराया कि इससे यमुना में जल प्रदूषित हो रहा है। आक्सीजन की मात्रा भी प्रभावित हो रही है।
पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम की भी अवहेलना हो रही है। अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि इस पर एनजीटी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रदेश सरकार, छावनी बोर्ड, केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दिए हैं। सभी को 16 दिसंबर तक इस पर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
गौरतलब रहे कि वृंदावन में भी यमुना किनारे कूडे़ के निस्तारण पर एनजीटी सख्त रुख अख्तियार किए हुए है। वृंदावन नगर पालिका यमुना किनारे कूडे़ को जलाकर निस्तारित करती है। मधुमंगल शुक्ला की याचिका पर एनजीटी अपने आदेश की अवहेलना होने पर डीएम मथुरा, ईओ वृंदावन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर 11.50 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुकी है।