मथुरा में रहस्यमयी हत्या की गुत्थी को सुलझाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने अहम भूमिका निभाई है। निकिता की निर्मम हत्या के बाद पुलिस को शुरू में शव की पहचान और आरोपियों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि एक छोटी सी नाक की लौंग (नोज रिंग) और एआई-संचालित प्रणाली की मदद से न केवल मृतका की शिनाख्त हो गई बल्कि कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफलता मिली है।
पहली बार मथुरा पुलिस ने एआई के मदद से हत्या की गुत्थी सुलझाई है। शुरुआत में पुलिस के पास मृतका की पहचान का कोई ठोस जरिया नहीं था। मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। जांच टीम ने गांडीव एप पर मृतका के चेहरे का फोटो अपलोड किया। इस एआई-आधारित एप ने सोशल मीडिया के विशाल डेटाबेस को स्कैन किया, जिससे हूबहू नाक की लौंग पहने हुए मृतका के चेहरे का मिलान उसकी इंस्टाग्राम आईडी से हो गया।
इसके बाद पुलिस ने इंस्टाग्राम से फोटो निकालकर सर्विलांस पर रन किया, जिससे युवती की कुंडली निकल आई। आईडी मिलने के बाद पुलिस को निकिता का नाम और उसके निवास स्थान की जानकारी मिली। परिजन का नंबर निकालकर मृतका का फोटो भेजा गया। इसके बाद उसकी शिनाख्त हो सकी।